उदयपुर। आगामी चुनावों के मद्देनजर निर्वाचन कार्य में नियुक्त कार्मिकों की भोजन व्यवस्था में वीआईपी और नॉन-वीआईपी का भेदभाव करने पर कर्मचारी संगठनों ने कड़ा आक्रोश जताया है। इसे असंवैधानिक और लोकतांत्रिक गरिमा के विपरीत बताते हुए अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एवं राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन राजस्थान सरकार, मुख्य चुनाव आयुक्त, मुख्य सचिव और राज्य निर्वाचन आयोग के नाम प्रेषित किया गया है।
क्या है पूरा मामला
महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष शेर सिंह चौहान ने बताया कि जिला कलेक्टर उदयपुर द्वारा ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर जारी भोजन व्यवस्था की निविदा में कार्मिकों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। एक ओर उच्च अधिकारियों के लिए शीर्षक के तहत शाही पकवान निर्धारित किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर मतदान दलों और अन्य कार्मिकों के लिए निम्न स्तर की व्यवस्था दर्शाई गई है।संविधान और समानता के अधिकार का उल्लंघन
महासंघ के जिलाध्यक्ष हेमंत कुमार पालीवाल ने तर्क दिया कि अनुच्छेद 14 का उल्लंघनरू भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है। निर्वाचन कार्य में सभी कार्मिक श्लोक सेवकश् होते हैं, अतः भोजन जैसी बुनियादी सुविधा में वर्ग आधारित भेदभाव अनुचित है। अवैध शब्दावली शब्द का प्रयोग किसी भी सेवा नियम या संविधान में परिभाषित नहीं है। प्रशासनिक दस्तावेजों में इस शब्द का उपयोग कर विशेषाधिकार युक्त वर्ग बनाना विधि विरुद्ध है।
मेनू में बड़ा अंतररू शाही पुलाव बनाम साधारण भोजन
जिला महामंत्री लच्छीराम गुर्जर ने निविदा के विवरण का हवाला देते हुए बताया कि वीआईपी मेनू इसमें पनीर, शाही पुलाव, ड्राई फ्रूट मिठाई, फल की प्लेट और सैंडविच जैसे व्यंजन शामिल हैं। सामान्य कार्मिक इनके लिए बेहद सीमित और साधारण भोजन तय किया गया है। यहाँ तक कि चाय की मात्रा में भी भेदभाव (75 उस बनाम 125 उस) किया गया है। राजकीय धन का अपव्यय संगठन ने इसे संस्कृति को बढ़ावा देने और राजकीय धन के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है।
प्रमुख मांगें
इस भेदभावपूर्ण निविदा की उच्च स्तरीय एवं स्वतंत्र जांच करवाई जाए। दोषी अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित कर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। भविष्य के लिए निर्वाचन कार्यों में समान भोजन-समान सम्मान के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं। राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश अध्यक्ष व अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष शेर सिंह चौहान, सयुंक्त महासंघ के जिलाध्यक्ष हेमंत कुमार पालीवाल, जिला महामंत्री लच्छीराम गुर्जर, आईटी प्रभारी जसवंत सिंह चौहान, राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश कोषाध्यक्ष सतीश जैन, प्रदेश प्रचार मंत्री सुरेश खंडारिया, जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर परमार जिला महामंत्री कमलेश शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष गिरवा प्रेम राज, बैरवा ब्लॉक अध्यक्ष बड़गांव, प्रेम सिंह भाटी, ब्लॉक शहर महामंत्री चेतराम मीणा, मनोज मोची, सुनील मखीजा, रईस खान, प्रदीप भानावत, सुरेश गरासिया, गजेंद्र शर्मा, नानकराम बैरवा, देवेंद्र सिंह, महावीर गढ़वाल, आकाश पाल, अशोक मीणा, राजस्थान पर्यटन विकास विभाग के जिलाध्यक्ष कमलेश वर्मा, राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील से विनोद शर्मा, हीरालाल गमेती, महिला संगठन मंत्री कमलेश चौधरी, महिला संयुक्त मंत्री कैलाश कुंवर, संगठन महामंत्री मदनलाल सिंगाडिया, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड से मुकेश शर्मा, पशुपालन संघ से खेमराज मीणा, मंसाराम अहारी, राजस्थान हैंडपंप मिस्त्री संघ से नन्दलाल लबाना, हीरालाल चंदेरिया, राजस्थान राज्य अधीनस्थ संघ से प्रकाश चंद खटीक, राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षा संघ से भेरुलाल कलाल, ग्राम विकास अधिकारी संघ से कमलेश सेन, राजस्थान कृषि पर्यवेक्षक स्नातक से शंकर नकवाल, निलेश यादव, पटवार संघ से प्रवीन मेनारिया, आयुर्वेद परिचारक संघ से अशोक भट्ट, आदि उपस्थित थे।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।
उदयपुर। आगामी चुनावों के मद्देनजर निर्वाचन कार्य में नियुक्त कार्मिकों की भोजन व्यवस्था में वीआईपी और नॉन-वीआईपी का भेदभाव करने पर कर्मचारी संगठनों ने कड़ा आक्रोश जताया है। इसे असंवैधानिक और लोकतांत्रिक गरिमा के विपरीत बताते हुए अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एवं राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन राजस्थान सरकार, मुख्य चुनाव आयुक्त, मुख्य सचिव और राज्य निर्वाचन आयोग के नाम प्रेषित किया गया है।




