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निकाय चुनाव में BJP का दबदबा, कांग्रेस ने भी दी कड़ी टक्कर; कई शहरों में निर्दलीय बने किंगमेकर

डेस्क अपडेट – राजस्थान निकाय चुनाव के चुनावी नतीजों ने शहरों की सियासत की पूरी तस्वीर बिल्कुल साफ कर दी है। इस महा-मुकाबले में बीजेपी सबसे ज्यादा वार्ड जीतकर नंबर-1 की कुर्सी पर काबिज हो गई है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने भी पूरे राज्य में अपने पंजे को जमकर चमकाया है।
हालांकि, मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवारों ने कई जगहों पर दोनों ही बड़ी पार्टियों का पूरा गणित बिगाड़ कर रख दिया है। जब आप राज्य के कुल 10,245 वार्डों के आंकड़ों पर गहराई से नजर डालेंगे, तो राजस्थान की शहरी राजनीति की एक बिल्कुल अलग और दिलचस्प कहानी सामने आती है।

राज्य के कुल 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों के इन चुनावी परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की शहरी राजनीति में अब छोटे और क्षेत्रीय दलों की हवा पूरी तरह टाइट हो चुकी है। जनता ने यह साफ संदेश दे दिया है कि सत्ता की इस दौड़ में केवल दो प्रमुख राजनीतिक धड़ों और बागी या निर्दलियों का ही सिक्का चलता है। आइए इस महा-विश्लेषण की एक-एक परत खोलकर देखते हैं कि किसका जनाधार चमका और कौन पानी मांगता नजर आया।

सबसे पहले बात करते हैं 98 फीसदी सीटों पर बने टॉप-3 के एकाधिकार की। राज्य के कुल वार्डों में से 98 फीसदी से ज्यादा सीटों पर सिर्फ तीन बड़ी ताकतों यानी बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलियों का ही दबदबा देखने को मिला है। इसका सीधा निचोड़ यह है कि जनता ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि शहरी राजनीति में किसी भी तीसरे विकल्प या क्षेत्रीय दल के लिए कोई जगह नहीं बची है। मुकाबला पूरी तरह से दोनों बड़ी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों के इर्द-गिर्द ही सिमट कर रह गया है।

इस रेस में बीजेपी ने कुल सीटों का भारी-भरकम 40.79 फीसदी हिस्सा अपने नाम करते हुए स्पष्ट रूप से नंबर-1 का ताज पहना है। प्रमुख नगर निगमों और शहरी निकायों में पार्टी ने या तो प्रचंड बहुमत हासिल किया या फिर सबसे मजबूत स्थिति दर्ज की, जिससे यह साबित होता है कि शहरी इलाकों में भगवा पार्टी की जड़ें सबसे गहरी हैं। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने 35.27 फीसदी सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी सियासी ताकत का पूरा लोहा मनवाया है। कई महत्वपूर्ण नगर निगमों में या तो स्पष्ट बहुमत या सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर कांग्रेस ने यह साबित कर दिया कि वह मुकाबले में बहुत मजबूती से डटी हुई है। इसके विपरीत, बाकी सभी क्षेत्रीय और छोटे दल मिलकर 2 फीसदी का आंकड़ा भी नहीं छू पाए और पूरी तरह धाराशयी हो गए। कई दलों का खाता तक नहीं खुला या वे गिनती के वार्डों में सिमट कर रह गए।

इन सबके बीच, 22 फीसदी से अधिक सीटों पर कब्जा जमाने वाले निर्दलीय इस चुनाव के सबसे बड़े गेमचेंजर साबित हुए हैं। कई जगहों पर त्रिशंकु स्थिति बन जाने के कारण अब मेयर और चेयरमैन की कुर्सी की असली चाबी पूरी तरह से इन्हीं निर्दलीयों के हाथों में आ गई है, जिनके आगे दोनों प्रमुख पार्टियों को हाथ-जोड़ने पड़ रहे हैं।

शहरी चुनावों के इन आंकड़ों के बाद आइए समझते हैं कि किस शहर में किसका पलड़ा भारी है। बीजेपी ने जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा नगर निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। जयपुर में घोषित 146 वार्डों में से बीजेपी के पास 78, कांग्रेस के पास 53 और निर्दलीयों के पास 15 पार्षद हैं। कोटा में बीजेपी के पास 55, कांग्रेस के पास 40 और निर्दलीयों के पास 3 सीटें हैं। उदयपुर में बीजेपी 53 और कांग्रेस 23 सीटों पर है, जबकि भीलवाड़ा में बीजेपी 45, कांग्रेस 10 और निर्दलीय 15 सीटों पर हैं। इन चारों निगमों में बीजेपी का बोर्ड बनना अब पूरी तरह तय माना जा रहा है।

दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी ने बीकानेर नगर निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जहां कांग्रेस के 42 और बीजेपी के 25 पार्षद चुनकर आए हैं। इसके अलावा अजमेर और पाली में भी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। अजमेर में कांग्रेस 37, बीजेपी 32 और निर्दलीय 11 सीटों पर हैं, जबकि पाली में कांग्रेस के 29 और बीजेपी के 21 पार्षद हैं। इन दोनों जगहों पर कांग्रेस की दावेदारी काफी मजबूत है, हालांकि बोर्ड गठन के लिए स्थानीय समीकरण बहुत अहम भूमिका निभाएंगे।

सबसे बड़ा खेल भरतपुर में देखने को मिला है, जहां निर्दलीयों ने सारे समीकरण पलट दिए हैं। 65 वार्डों वाले इस निगम में निर्दलीयों ने अकेले 36 सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि बीजेपी 20 और कांग्रेस महज 7 सीटों पर सिमट गई। जोधपुर में मुकाबला बेहद दिलचस्प है क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही 44-44 सीटों पर बराबरी पर हैं, ऐसे में यहां निर्दलीय और अन्य पार्षद ही बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। अलवर की बात करें तो यहां बीजेपी 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि कांग्रेस 23 और निर्दलीय 13 सीटों पर काबिज हैं05 टाइटल भेजिए और खबर को सही करके भेजिए

डेस्क अपडेट – राजस्थान निकाय चुनाव के चुनावी नतीजों ने शहरों की सियासत की पूरी तस्वीर बिल्कुल साफ कर दी है। इस महा-मुकाबले में बीजेपी सबसे ज्यादा वार्ड जीतकर नंबर-1 की कुर्सी पर काबिज हो गई है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने भी पूरे राज्य में अपने पंजे को जमकर चमकाया है।
हालांकि, मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवारों ने कई जगहों पर दोनों ही बड़ी पार्टियों का पूरा गणित बिगाड़ कर रख दिया है। जब आप राज्य के कुल 10,245 वार्डों के आंकड़ों पर गहराई से नजर डालेंगे, तो राजस्थान की शहरी राजनीति की एक बिल्कुल अलग और दिलचस्प कहानी सामने आती है।

राज्य के कुल 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों के इन चुनावी परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की शहरी राजनीति में अब छोटे और क्षेत्रीय दलों की हवा पूरी तरह टाइट हो चुकी है। जनता ने यह साफ संदेश दे दिया है कि सत्ता की इस दौड़ में केवल दो प्रमुख राजनीतिक धड़ों और बागी या निर्दलियों का ही सिक्का चलता है। आइए इस महा-विश्लेषण की एक-एक परत खोलकर देखते हैं कि किसका जनाधार चमका और कौन पानी मांगता नजर आया।

सबसे पहले बात करते हैं 98 फीसदी सीटों पर बने टॉप-3 के एकाधिकार की। राज्य के कुल वार्डों में से 98 फीसदी से ज्यादा सीटों पर सिर्फ तीन बड़ी ताकतों यानी बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलियों का ही दबदबा देखने को मिला है। इसका सीधा निचोड़ यह है कि जनता ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि शहरी राजनीति में किसी भी तीसरे विकल्प या क्षेत्रीय दल के लिए कोई जगह नहीं बची है। मुकाबला पूरी तरह से दोनों बड़ी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों के इर्द-गिर्द ही सिमट कर रह गया है।

इस रेस में बीजेपी ने कुल सीटों का भारी-भरकम 40.79 फीसदी हिस्सा अपने नाम करते हुए स्पष्ट रूप से नंबर-1 का ताज पहना है। प्रमुख नगर निगमों और शहरी निकायों में पार्टी ने या तो प्रचंड बहुमत हासिल किया या फिर सबसे मजबूत स्थिति दर्ज की, जिससे यह साबित होता है कि शहरी इलाकों में भगवा पार्टी की जड़ें सबसे गहरी हैं। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने 35.27 फीसदी सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी सियासी ताकत का पूरा लोहा मनवाया है। कई महत्वपूर्ण नगर निगमों में या तो स्पष्ट बहुमत या सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर कांग्रेस ने यह साबित कर दिया कि वह मुकाबले में बहुत मजबूती से डटी हुई है। इसके विपरीत, बाकी सभी क्षेत्रीय और छोटे दल मिलकर 2 फीसदी का आंकड़ा भी नहीं छू पाए और पूरी तरह धाराशयी हो गए। कई दलों का खाता तक नहीं खुला या वे गिनती के वार्डों में सिमट कर रह गए।

इन सबके बीच, 22 फीसदी से अधिक सीटों पर कब्जा जमाने वाले निर्दलीय इस चुनाव के सबसे बड़े गेमचेंजर साबित हुए हैं। कई जगहों पर त्रिशंकु स्थिति बन जाने के कारण अब मेयर और चेयरमैन की कुर्सी की असली चाबी पूरी तरह से इन्हीं निर्दलीयों के हाथों में आ गई है, जिनके आगे दोनों प्रमुख पार्टियों को हाथ-जोड़ने पड़ रहे हैं।

शहरी चुनावों के इन आंकड़ों के बाद आइए समझते हैं कि किस शहर में किसका पलड़ा भारी है। बीजेपी ने जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा नगर निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। जयपुर में घोषित 146 वार्डों में से बीजेपी के पास 78, कांग्रेस के पास 53 और निर्दलीयों के पास 15 पार्षद हैं। कोटा में बीजेपी के पास 55, कांग्रेस के पास 40 और निर्दलीयों के पास 3 सीटें हैं। उदयपुर में बीजेपी 53 और कांग्रेस 23 सीटों पर है, जबकि भीलवाड़ा में बीजेपी 45, कांग्रेस 10 और निर्दलीय 15 सीटों पर हैं। इन चारों निगमों में बीजेपी का बोर्ड बनना अब पूरी तरह तय माना जा रहा है।

दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी ने बीकानेर नगर निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जहां कांग्रेस के 42 और बीजेपी के 25 पार्षद चुनकर आए हैं। इसके अलावा अजमेर और पाली में भी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। अजमेर में कांग्रेस 37, बीजेपी 32 और निर्दलीय 11 सीटों पर हैं, जबकि पाली में कांग्रेस के 29 और बीजेपी के 21 पार्षद हैं। इन दोनों जगहों पर कांग्रेस की दावेदारी काफी मजबूत है, हालांकि बोर्ड गठन के लिए स्थानीय समीकरण बहुत अहम भूमिका निभाएंगे।

सबसे बड़ा खेल भरतपुर में देखने को मिला है, जहां निर्दलीयों ने सारे समीकरण पलट दिए हैं। 65 वार्डों वाले इस निगम में निर्दलीयों ने अकेले 36 सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि बीजेपी 20 और कांग्रेस महज 7 सीटों पर सिमट गई। जोधपुर में मुकाबला बेहद दिलचस्प है क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही 44-44 सीटों पर बराबरी पर हैं, ऐसे में यहां निर्दलीय और अन्य पार्षद ही बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। अलवर की बात करें तो यहां बीजेपी 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि कांग्रेस 23 और निर्दलीय 13 सीटों पर काबिज हैं

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Author: dailyrajasthan

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