उदयपुर – जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में युवाओं को नशे से दूर रखने, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जागृति युवा चेतना, नशा मुक्त जीवन अभियान के तहत गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में छात्र कल्याण एवं नशा विरोधी जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन एवं आईपीएस अधिकारी सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान छात्रों को एनडीपीएस एक्ट के कड़े प्रावधानों की जानकारी देते हुए नशीले पदार्थों के सेवन, कब्जे और वितरण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में बताया गया।
अधिकारियों ने विद्यार्थियों को नशे के व्यक्तिगत, सामाजिक, शैक्षणिक और करियर पर पड़ने वाले दुष्परिणामों के बारे में भी जानकारी दी। संवाद के दौरान युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, मानसिक तनाव तथा इससे होने वाली समस्याओं पर चर्चा करते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का तकनीकी संचालन गीतांजलि मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र जीनगर तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. भक्ति मुरके ने किया। मनोचिकित्सकों ने नशीले पदार्थों के उपयोग से जुड़ी समस्याओं की समय रहते पहचान, रोकथाम, जिम्मेदार निर्णय लेने और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में संस्थान की भूमिका पर जानकारी दी।
इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग, उदयपुर के कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर नशे के दुष्प्रभावों और नशीले पदार्थों के कारण परिवारों पर पड़ने वाले प्रभावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर गीतांजलि मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. संगीता गुप्ता ने विद्यार्थियों के कल्याण, जागरूकता और नशे के खिलाफ सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को नशा मुक्ति, मानसिक स्वास्थ्य, कानूनी जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक किया गया।





