उदयपुर – पशुपालन विभाग की ओर से आयोजित पशु मेले में पिछले दो दिनों से विभिन्न पशु वर्गों की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिताओं में पशुपालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मेले में गोवंश, भैंसवंश और अश्ववंश के पशुओं ने अपनी विशेषताओं के आधार पर प्रतियोगिताओं में भागीदारी निभाई। प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले पशुओं को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
मेले में 9 अक्टूबर को गोवंश की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। साथ ही बैल वर्ग में 7 पशुओं तथा गाय वर्ग में 33 गायों का पंजीकरण हुआ। इसी क्रम में शनिवार 10 अक्टूबर को भैंसवंश एवं अश्ववंश की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। भैंसवंश वर्ग में 25 तथा अश्ववंश वर्ग में 75 पशुओं का पंजीकरण किया गया। इन प्रतियोगिताओं में अन्य जिलों से आए पशुपालकों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया। दूरदराज के जिलों से पहुंचे अश्वपालक अपने घोड़ों को विशेष एसी एंबुलेंस के माध्यम से मेला परिसर में लेकर आए, जो आकर्षण का केंद्र रहा।
पशु मेले में पशु प्रतियोगिताओं के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। प्रतिदिन शाम 7 से रात 10 बजे तक लोक कला मंडल के कलाकारों द्वारा लोक नृत्य एवं लोक गायन की रंगारंग प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से राजस्थान की लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है।
प्रतियोगिताओं के दौरान उदयपुर संभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. शैलेंद्र कुमार शुक्ल तथा मेला अधिकारी एवं उदयपुर जिले के संयुक्त निदेशक डॉ. लज्जाराम मीणा उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतियोगिताओं में भाग लेने पहुंचे पशुपालकों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में बीवीएचओ मावली डॉ. कृष्णगोपाल नामा ने मेले में पधारे सभी पशुपालकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुकेश नागोरी ने किया।





