उदयपुर। बढ़ती महंगाई के दौर में समाज को आर्थिक बोझ से मुक्त करने और कुरीतियों को मिटाने के उद्देश्य से जिले के समीपवर्ती नाई गांव में मेघवाल समाज ने एक ऐतिहासिक और अनुकरणीय निर्णय लिया है। समाज के युवाओं और वरिष्ठ जनों ने एक जाजम पर आकर वर्षों से चली आ रही पेरावणी प्रथा को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया है।
नाई गांव के इकाई अध्यक्ष ललित कुमार और रमेश मेघवाल ने बताया कि समाज में बदलाव लाने के लिए एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सभी की सहमति से यह माना गया कि वर्तमान समय में पेरावणी प्रथा केवल एक दिखावा और आर्थिक बोझ बन गई है, जिसका समाज की उन्नति में कोई योगदान नहीं है।
बता दे यह प्रथा कई वर्षों से समाज में एक रूढ़िवादी परंपरा का रूप ले चुकी थी। लेन-देन का चक्र सामाजिक आयोजनों में बहनें अपने भाइयों या रिश्तेदारों को उपहार स्वरूप कपड़े देती थीं। बदले में भाई, मामा, काका और अन्य रिश्तेदार भी उपहार के बदले कपड़े ही देते थे। इस पूरी प्रक्रिया में हजारों रुपये खर्च होते थे, लेकिन इससे किसी को कोई वास्तविक लाभ या मुनाफा नहीं होता था। महंगाई के इस दौर में यह मध्यम और गरीब परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन गया था। इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब से इस प्रथा को बंद किया जाएगा ताकि परिवार अपनी मेहनत की कमाई को बच्चों की शिक्षा और अन्य जरूरी कार्यों में लगा सकें।
बैठक में इस सामाजिक सुधार की मुहिम में मांगी लाल, ऊकार लाल, किशन लाल, प्रकाश मेघवाल (देवाली) और श्यामलाल सहित समाज के कई प्रबुद्ध जन और युवा मौजूद रहे।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।
उदयपुर। बढ़ती महंगाई के दौर में समाज को आर्थिक बोझ से मुक्त करने और कुरीतियों को मिटाने के उद्देश्य से जिले के समीपवर्ती नाई गांव में मेघवाल समाज ने एक ऐतिहासिक और अनुकरणीय निर्णय लिया है। समाज के युवाओं और वरिष्ठ जनों ने एक जाजम पर आकर वर्षों से चली आ रही पेरावणी प्रथा को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया है।




