
उदयपुर। जिला कांग्रेस कमेटी उदयपुर देहात (पर्यावरण प्रकोष्ठ) के नेतृत्व में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपा। जिला कांग्रेस पर्यावरण प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष योगेश पुष्करणा ने बताया कि अरावली क्षेत्र में लागू किए गए 100 मीटर नियम पर पुनर्विचार करने तथा पर्वतमाला को पूर्ण रूप से संरक्षित करने की मांग की हैं।
ज्ञापन में बताया कि अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली सहित कई राज्यों के जलस्तर, पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता और जलवायु संतुलन के लिए जीवन रेखा के समान है। हाल ही में अरावली क्षेत्र को लेकर किए गए प्रावधानों के अंतर्गत 100 मीटर तक की पहाड़ियों को अरावली श्रेणी से बाहर करने का निर्णय वैज्ञानिक तथ्यों के विपरीत बताया गया है। इस निर्णय से पहाड़ों की अंधाधुंध कटाई, खनन गतिविधियों में बढ़ोतरी, जंगलों का विनाश और गंभीर पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याएं उत्पन्न होंगी, जिसका सीधा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। संगठन ने इसे केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि जनहित और भविष्य से जुड़ा विषय बताया। वहीं राष्ट्रपति से अरावली से संबंधित 100 मीटर नियम पर पुनर्विचार करने और अरावली पर्वतमाला को पूर्ण रूप से संरक्षित क्षेत्र घोषित करने और खनन व अन्य विनाशकारी विकास गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित करने की मांग की हैं।
इस दौरान संगठन महामंत्री संदीप बारबर, जिला उपाध्यक्ष अमृत लाल मेघवाल, उपाध्यक्ष शंकर सालवी, जिला महासचिव (यूथ कांग्रेस) मोहित चौधरी, गोगुंदा विधानसभा संगठन महामंत्री दुष्यंत शर्मा, जिला महासचिव जितेन्द्र शुक्ला, जिला महासचिव (यूथ कांग्रेस) दीपक पुष्करणा, गोगुंदा विधानसभा यूथ कांग्रेस उपाध्यक्ष गोपाल डूंगरी, तन्मय श्रीमाली, जिला महासचिव मांगीलाल कविता, जिला महासचिव हार्दिक तेली, जिला महासचिव संजय पुष्करणा, जिला उपाध्यक्ष मांगी लाल गायरी ऐससी मोर्चा नान्देशमा मंडल अध्यक्ष चुनीलाल मेघवाल, सचिव दीपक जोशी, जिला सचिव मोहित सालवी, जितेन्द्र गमेती सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहें ।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।





