
गोगुंदा। तहसील कार्यालय में बिना लाइसेंसधारी लेखकों और बिना अधिवक्ता के सत्यापन के हो रहे दस्तावेजों के पंजीयन को लेकर बार एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाया है। एसोसिएशन ने उपपंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) को ज्ञापन सौंपकर नियम विरुद्ध हो रहे कार्यों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। एसोसिएशन ने ज्ञापन में बताया कि वर्तमान में उपपंजीयक कार्यालय में विक्रय पत्र, गोदनामा, दान पत्र और वसीयत जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज पंजीयन हेतु प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनमें न तो किसी अधिवक्ता के हस्ताक्षर व मुहर है और न ही किसी अधिकृत प्रलेख लेखक का लाइसेंस नंबर अंकित है। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि तहसील परिसर में बैठे कुछ अनधिकृत फोटोकॉपी राइटर और बिना लाइसेंसधारी लोग इन दस्तावेजों को टाइप कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में सबसे बड़ा नुकसान गरीब काश्तकारों को हो रहा है। अशिक्षित काश्तकारों को भ्रम में रखकर भू-माफिया उनकी बेशकीमती जमीन कम दामों में अपने नाम करवा रहे हैं। जब तक काश्तकार को असलियत का पता चलता है, तब तक जमीन तीसरे या चौथे व्यक्ति के नाम दर्ज हो चुकी होती है। बार एसोसिएशन का तर्क है कि यदि कोई दस्तावेज अधिवक्ता या अधिकृत प्रलेख लेखक के माध्यम से तैयार होता है, तो वे दोनों पक्षों से पूछताछ कर तथ्यों का सत्यापन करते हैं। इससे किसी भी पक्षकार को आर्थिक हानि नहीं होती। भविष्य में होने वाले कानूनी विवादों में कमी आती है। वही बार एसोसिएशन ने उपपंजीयक से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में केवल उन्हीं दस्तावेजों का पंजीयन किया जाए जो विधिसम्मत तरीके से अधिकृत व्यक्तियों द्वारा तैयार और सत्यापित हों।
इस दौरान बार एसोसिएशन अध्यक्ष राजवीरसिंह झाला, महासचिव दुर्गाशंकर पालीवाल, उपाध्यक्ष चेतन वैष्णव, सचिव अरुण पालीवाल, कोषाध्यक्ष सुर्य राज,रेखा पांडे, हितेश आचार्य, पुरोषतम पुरी, कुशाल सिंह राणावत, देवेंद्र, धर्मेंद्र, लक्ष्मण पालीवाल, नारायण गरासिया , लक्ष्मण पुरी गोस्वामी , शिव शंकर जोशी, दिनेश, राजेश चौधरी ,दुर्गेश मेघवाल, मनीष मेघवाल सहित कई अधिवक्ता मौजूद थे।





