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अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य का उदयपुर दौरा

उदयपुर– राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने सोमवार को जिला परिषद सभागार में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक ली। श्री आर्य ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 11 करोड़ 43 लाख आदिवासी रहते हैं। इन आदिवासियों की सुरक्षा, देखरेख, योजनाओं के माध्यम से आदिवासियों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव का अध्ययन और मूल्यांकन करना आयोग का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि उदयपुर भी एक आदिवासी बाहुल्य जिला है। अधिकारी ज्यादा से ज्यादा फील्ड का दौरा करें और जनजाति इलाकों में रात्रि विश्राम करें, ताकि आदिवासियों की समस्याओं का पता चले। सभी अधिकारी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करें। आदिवासी मेहनती और स्वभाव से सरल होते हैं, वे अपनी समस्याएं बताने में झिझकते हैं। इसलिए अनुसूचित जनजाति वर्ग के उत्थान के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता है।

वनाधिकारी पट्टे के साथ मिले पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ-
उन्होंने कहा कि जिनको वनाधिकार के पट्टे दिए गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ दिलाना सुनिश्चित किया जाए। वनाधिकार वालों को पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ देने का प्रावधान है। वनाधिकार पट्टे प्राप्त करने वाले ऐसे लोग जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से वंचित हैं, उनको एक माह में लाभ दिलवाएं। पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले में मनरेगा के तहत प्रधानमंत्री सड़क योजना और स्टेट हाइवे के किनारे खाली जमीन पर नीम, करंजी और महुवा के पेड़ लगाने का सुझाव दिया।
जिला कलक्टर नमित मेहता ने विभागीय अधिकारियों को आयोग अध्यक्ष के निर्देशानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिला परिषद सीईओ रिया डाबी ने धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान के तहत गांवों में लगाए गए कैंपों की उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आदि कर्मयोगी अभियान के तहत ग्राम पंचायतों में कैम्प लगवाकर ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी दी। जनजाति समुदायों को सशक्त बनाने और स्थानीय नेतृत्व को विकसित करने के लिए विलेज एक्शन प्लान बनवाकर 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं में अनुमोदन भी करवाया है। ग्राम पंचायतों में सर्वे करवाकर सरकारी योजनाओं से वंचित जनजाति समुदाय के लोगों का डाटाबेस तैयार करवाया है। 17 हजार से अधिक लोगों को पोर्टल पर आदि कर्मयोगी के रूप में पंजीकृत किया गया है।

योजनाओं और कार्यक्रमों की जानी प्रगति-
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, वन धन विकास केंद्र, पीएम-किसान योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, मोबाइल कनेक्टिविटी रहित बस्तियों की संख्या, वनाधिकार, संस्थागत प्रसव, सिकल सेल एनीमिया, सरकारी विद्यालयों और उच्च शिक्षा में एसटी विद्यार्थियों की संख्या, प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, कौशल विकास और रोजगार सहित अन्य योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से जिले के अनुसूचित जनजाति समुदाय के जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली।

शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर फोकस-
आर्य ने प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और उच्च शिक्षा में एसटी समुदाय की भागीदारी के आंकड़ों पर चर्चा करते हुए कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय में गरीबी दर सबसे अधिक है और इसी तरह एसटी पुरुषों व महिलाओं की साक्षरता दर भी अन्य वर्गों की तुलना में कम है। उन्होंने छात्र-शिक्षक अनुपात, अनुसूचित जाति बालिकाओं में ड्रॉपआउट, कुपोषण और संस्थागत प्रसव की स्थिति पर चिंता जताते हुए पूर्ण गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता बताई। बड़ी संख्या में वनाधिकार दावे निरस्त होने पर आयोग अध्यक्ष ने असंतोष जताया और रिव्यू के निर्देश दिए। आर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां मोबाइल टावर लगे हैं वहां नेटवर्क तुरंत चालू करवाएं, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों में संचार व्यवस्था सुदृढ़ हो सके। टीएडी उपायुक्त रागिनी डामोर ने जिले में एसटी समुदाय की जनसंख्या, साक्षरता दर, बीपीएल स्थिति, आकांक्षी ब्लॉक और विकास योजनाओं की प्रगति का पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुतीकरण किया। इससे पहले आयोग के डिप्टी डायरेक्टर आर. के. दुबे ने आयोग के गठन, उद्देश्य और कार्यप्रणाली की जानकारी दी।

एसटी की जमीन पर कब्जे के मामलों में पुलिस कार्रवाई पर सवाल-

आयोग अध्यक्ष ने पुलिस द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति से जुड़े भूमि विवाद मामलों में जांच के बाद बड़ी संख्या में प्रकरणों को बंद करने पर सवाल उठाया। विशेष रूप से उन मामलों में, जहां अनुसूचित जनजाति की भूमि पर नॉन-एसटी व्यक्तियों द्वारा कब्जा कर लिया जाता है, जबकि कानून के तहत इस पर सख्त कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान ऐसे कई मामले सिविल नेचर के मानकर बंद कर दिए जाते हैं, जबकि नियमानुसार राजस्व अधिकारी की जांच में कब्जा सामने आने पर पेनल्टी और मुकदमे की कार्रवाई होनी चाहिए।
पिछले तीन वर्षों में ऐसे कई प्रकरण बंद कर दिए गए, जिनमें स्पष्ट कब्जा या भूमि विवाद की स्थिति थी। अब जांच की समय सीमा 90 दिन से घटाकर 60 दिन कर दी गई है। ऐसे में 60 दिन से अधिक लंबित रहने वाले मामलों की रिपोर्ट मांगी। उन्होंने प्रत्येक प्रकरण को समयबद्ध तरीके से निपटाने और भूमि विवाद के मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रेस वार्ता को किया सम्बोधित-
समीक्षा के बाद आयोग अध्यक्ष ने जिला परिषद सभागार में प्रेस वार्ता को सम्बोधित भी किया। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत सरकार आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण और समयबद्ध मिशन चला रही है। आदिवासी क्षेत्रों में सेवाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को परिपूर्णता प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है।

सर्किट हाउस में लगाया ‘एक पेड़ मां के नाम‘-
आयोग अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने सर्किट हाउस में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण भी किया। इस अवसर पर उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

Pavan Meghwal
Author: Pavan Meghwal

पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।

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