
’डॉ गुलाब चन्द जिन्दल ’मेघ’’
सामाजिक चिंतक
अजमेर – 9460180510
गत 30 मार्च से 3 अप्रैल 2026 तक लेखक व पत्रकार भंवर मेघवंशी के संयोजन में अपने प्राचीन धर्म स्थलों, धूणियों पर सामाजिक आध्यात्मिक संवादके लिए ’“महामेघ धर्म जागरण यात्रा“’ का आयोजन किया गया। यह यात्रा भीलवाड़ा के झरणा महादेव तीर्थस्थल पर स्थित बाबा रामदेव मंदिर से शुरू होकर उदयपुर जिले के गुंदाली गांव के समीप स्थित जरगाजी जूना स्थान पर संपन्न हुई। इससे पहले 2 अप्रेल 2026 को उदयपुर जिले के ही सायरा ब्लॉक के पलासमा गांव के समीप स्थित जरगाजी नयास्थान पर जरगाजी विकास ट्रस्ट व जेबीआर ग्रुप द्वारा विशाल भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें कबीर भजन गायक पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया ने कबीर भजनों की प्रस्तुतियां दी।
इस अवसर पर प्रख्यात लेखक पत्रकार सामाजिक चिंतक विचारक भंवर मेघवंशी ने अपने उद्बोधन में हजारों सामाजिक धार्मिक श्रद्धालुओं को बलाई समाज अजमेर के प्रगतिशील विचारधारा के पुरखों की धरोहर ’बाबा रामदेव मंदिर (बड़ा मंदिर) पाल बीचला, नला, अजमेर (1933) के भवन परिसर, धर्म स्थलों का सामाजिक कार्यों में उपयोग, शिक्षा संबंधी सामाजिक गतिविधियों की जानकारी दी।’ यहां उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं की भी जानकारी दी। वास्तव में यह मंदिर परिसर दूसरे क्षेत्रों के समाज बंधुओं को देखने लायक और प्रेरणा लेने लायक स्थान है। उन्होंने अपने उद्बोधन में संत कबीर के भजन की लाइन ’“मन लागो मेरो यार फकीरी में“’ पर मजाकिया टिप्पणी की। उन्होंने कहा मेरा समाज तो अधिकांश बीपीएल में है, ऊपर से हम हमारा मन भी ’फकीरी’ में ही लगाने की बात कर रहे हैं। अब इस भजन में ’फकीरी’ शब्द की जगह “अमीरी“ शब्द जोड़ने की जरूरत है।’ हमें शिक्षा, संसाधनों, चल-अचल सम्पत्ति विकास आर्थिक समृद्धि की ओर चलना होगा। यद्यपि महान संत कबीर की इस वाणी में ’’फकीरी’’ शब्द का उपयोग महिमा का बखान आध्यात्म के निमित्त किया गया है।

समाज को अब शिक्षा, सामाजिक उत्थान, राजनीतिक जागृति, और कुरीतियों का समूल उन्मूलन करना होगा। हमारी प्राचीन धर्म स्थलों, धूणियों को संरक्षित रखते हुए यहां के विचारों से जन-जन को अवगत कराना होगा। उल्लेखनीय है कि ’“महामेघ धर्म जागरण यात्रा“’ में 11 प्राचीन धूणियों, 25 धर्म स्थानों की यात्रा की। इनको धर्म स्थल होने के साथ सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ने की बात रखी।
धर्म के आवरण और चाशनी में सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार परक, राजनीतिक जागरूकता को नहीं छोड़ना चाहिए। अब तो मन अमीरी में लगाना होगा ,साथ ही महान संत कबीर ने अपनी वाणियों में जो चेतावनियां दी हैं उनको समझने और आत्मसात करने का समय है। हमारे बुजुर्ग कबीर वाणियों को घर-घर गाते थे। अजमेर में इसका प्रभाव भी दिखा जिससे अजमेर सामाजिक कुरीतियों के निवारण और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी हुआ।
अफसोस हमने हमारी धरोहरों को छोड़कर अन्य धार्मिक कर्मकांडों, जयजयकारों की ओर कदम बढ़ा लिए जिससे सामाजिक विकास में ठहराव आ गया।
अत्त दीपो भव





