उदयपुर में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और पैसिफिक मेडिकल कॉलेज ने ‘जागृति-युवा चेतना, नशा मुक्त जीवन’ अभियान शुरू किया है। अभियान में स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता से लेकर काउंसलिंग, उपचार, पुनर्वास और हाई रिस्क युवाओं की निगरानी तक 7 चरणों में काम किया जाएगा।
उदयपुर – युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को रोकने, मानसिक तनाव को कम करने और सुरक्षित व स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से उदयपुर पुलिस और पैसिफिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल की संयुक्त पहल पर ‘जागृति-युवा चेतना, नशा मुक्त जीवन’ अभियान की शुरुआत की गई। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों, शिक्षकों और सैकड़ों विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद ‘आरोग्य सेवा संस्थान’ के कलाकारों ने नशे के दुष्प्रभावों पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। भावुक और प्रभावशाली प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद विद्यार्थियों को नशे के खिलाफ सोचने और जागरूक होने के लिए प्रेरित किया।
जिला पुलिस अधीक्षक उदयपुर डॉ. अमृता दुहन ने विद्यार्थियों से कहा कि शैक्षणिक तनाव और व्यवहार संबंधी समस्याओं का समाधान नशा कतई नहीं है। युवाओं को अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाने की जरूरत है। अभियान के तहत एक विशेष हेल्पलाइन नंबर 8764527201 भी जारी किया गया है। इस नंबर पर युवा या उनके परिजन नशे से जुड़ी समस्या अथवा अवैध मादक पदार्थ बेचने वालों की जानकारी दे सकते हैं।
सात चरणों में चलेगा अभियान
उदयपुर पुलिस ने अभियान को धरातल पर प्रभावी बनाने के लिए ‘7-Step’ सख्त कार्रवाई कार्यक्रम की घोषणा की है। इसके तहत ‘चिकित्सा-परामर्श, उपचार और पुनर्वास’ को मुख्य आधार बनाया गया है।
अभियान में जिले के स्कूल-कॉलेजों में व्यापक नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संबंधित सरकारी विभागों के साथ समन्वय कर कार्यशालाएं होंगी। मनोचिकित्सकों और काउंसलर्स के विशेष सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। विद्यार्थियों से गोपनीय रूप से जानकारी लेने के लिए कॉलेजों में फीडबैक बॉक्स लगाए जाएंगे।
नशे की चपेट में आ चुके या संवेदनशील विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें हाई रिस्क और लोअर टारगेट ग्रुप में वर्गीकृत किया जाएगा। गंभीर रूप से नशे के आदी युवाओं को नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कर उपचार कराया जाएगा। साथ ही प्रभावित युवाओं के माता-पिता को काउंसलिंग और दिशा-निर्देश दिए जाएंगे तथा उनकी निरंतर निगरानी की जाएगी।
डॉक्टरों ने बताए नशे के गंभीर दुष्प्रभाव
कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह दी। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के साइकियाट्री विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश गोचर ने नशे से पूरी तरह दूरी बनाए रखने पर जोर दिया। मनोचिकित्सक डॉ. आभा ने नशे के कारण, इसकी लत और उपचार के बारे में जानकारी दी तथा हेल्पलाइन नंबर 1446, 1933 और 112 की जानकारी साझा की।
आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राहुल जैन ने शराब के खतरनाक वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला, जबकि पैसिफिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के वाइस चांसलर डॉ. एम.एम. मंगल ने बच्चों में नशे के कारण होने वाले गंभीर शारीरिक और मानसिक नुकसान के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर उमेश ओझा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुख्यालय मुकुल शर्मा और पुलिस निरीक्षक अपराध शाखा टीना सोलंकी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।






