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जरगाजी नया स्थान पर आ रहे है कबीर भजन गायक पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया, महामेघ धर्म जागरण यात्रा का होगा स्वागत

सायरा – अरावली की वादियों में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल जरगाजी नया स्थान पर गुरूवार को एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बनेगा। भीलवाड़ा के झरणा महादेव से शुरू हुई महामेघ धर्म जागरण यात्रा आज गुरूवार शाम 5 बजे अपने गंतव्य पर पहुँचेगी, जहाँ इसका भव्य स्वागत किया जाएगा। इस अवसर पर आयोजित होने वाली विशाल भजन संध्या में देश के सुप्रसिद्ध कबीर भजन गायक पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया अपनी प्रस्तुति देंगे।

धार्मिक स्थलों का जुड़ाव और सामाजिक संदेश

ट्रस्ट उपाध्यक्ष नाना लाल मेघवाल ने जानकारी दी कि यह यात्रा बीते 30 मार्च को भीलवाड़ा के झरणा महादेव स्थित बाबा रामदेव मंदिर से रवाना हुई थी। यात्रा ने भीलवाड़ा, राजसमंद और पाली जिलों के विभिन्न संतों की धूणियों के दर्शन करते हुए एक लंबा सफर तय किया है। यात्रा संयोजक देवी लाल मेघवंशी के अनुसार, इस अभियान का मूल उद्देश्य केवल धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि समाज में एकता, जागरूकता और शिक्षा की अलख जगाना है।

समता और शिक्षा पर जोर
लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार भंवर मेघवंशी ने यात्रा के व्यापक उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह यात्रा सामाजिक समरसता, श्रम के सम्मान और अपनी परंपराओं के संरक्षण का संदेश लेकर निकली है। 4 जिलों के 25 महत्वपूर्ण स्थानों और 11 प्रमुख धूणियों से गुजरने वाली इस यात्रा ने रास्ते भर जन-संवाद के माध्यम से कुरीतियों के उन्मूलन और शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया है।

भजन संध्या में जुटेंगे हजारों श्रद्धालु
ट्रस्ट अध्यक्ष गुलाबचंद मेघवाल ने बताया कि आज रात 8 बजे से शुरू होने वाली भजन संध्या की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के प्रहलाद सिंह टिपानिया अपनी टीम के साथ पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर कबीर की वाणी को स्वर देंगे। इस आयोजन में मेवाड़, मारवाड़ और प्रदेशभर से संतों, साहित्यकारों और समाजसेवियों सहित हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

जरगाजी का यह श्नया स्थानश् वही पवित्र भूमि है जहाँ संत जरगाजी ने अपनी कठिन साधना के बाद जीवित समाधि ली थी। यह स्थल अरावली की तलहटी में पलासमा के पास स्थित है।

पौराणिक प्रसंग मान्यताओं के अनुसार, संत जरगाजी का जन्म सायरा के गायफल गाँव में हुआ था। उन्होंने सांसारिक जीवन त्याग कर वैराग्य अपनाया। लोक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि इसी स्थान पर संतों के आशीर्वाद से मेवाड़ के महाराणा मोकल को पुत्र रत्न (महाराणा कुम्भा) की प्राप्ति हुई थी।

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Author: dailyrajasthan

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