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हिंदी भाषा, संस्कृति, परिवेश को संजाने के लिए एक जुट हो कर कार्य करना होगा- पूर्व राज्यमंत्री रविकांत गर्ग

कोटा । आज हिंदी भाषा, हमारी संस्कृति और हमारे परिवेश को संजाने की महत्ती आवश्यकता है। इसके लिए हम समस्त भारतवासियों को एकजुट होकर कार्य करना पड़ेगा। यह विचार उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्य मंत्री रविकांत गर्ग ने व्यक्त किए। वे नाथद्वारा में आयोजित भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति बाल साहित्य सम्मान समारोह के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने हिंदी भाषा के विकास के सेनानी भगवती प्रसाद को स्मरण करते हुए कहा कि आज यदि हमारी भाषा जीवित रही तो हमारी संस्कृति भी जीवित रह सकेगी अन्यथा हम अपने लक्ष्य से भटक जाएंगे। हिंदी भाषा के साहित्यकार एवं विद्वानों को हिंदी के प्रति पूर्ण समर्पण रखना चाहिए। उन्हें हिंदी के विकास के लिए साहित्यकारों को कुछ इस तरह की सृजन करना चाहिए कि जिससे हिंदी का पाठक वर्ग समृद्ध हो।
कार्यक्रम के अध्यक्ष पंजाब चंडीगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अमर सिंह बधान ने कहा कि साहित्य मंडल का प्रयास स्तुत्य है। हिंदी भाषा एवं हिंदी भाषा विदों और साहित्य सेवियों के लिए साहित्य मंडल प्रारंभ से ही समर्पित रहा है। आगे भी समर्पित रहेगा। दिल्ली के साहित्यकार डॉ. राहुल, उदयपुर डॉ. जयप्रकाश शाकद्वीपीय, संतोष रिचा, जबलपुर की रचनाकार डॉ. गीत गीत ने बाबूजी स्मृति प्रसंग से बाबूजी के हिंदी विकास के प्रयासों की चर्चा कर उनके अध्यात्म और दर्शन पर प्रकाश डालते हुए अपने आलेख पत्र प्रस्तुत किए। गुना के महेश बोर , कोटा के रामेश्वर प्रसाद रामू भैया और राया मथुरा के अंजीव अंजुम ने अपनी काव्यात्मक श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग का अभिनंदन पत्र, शॉल, माला, उत्तरीय, श्रीफल, मेवाड़ी पगड़ी एवं श्रीनाथजी की छवि के साथ अभिनंदन किया गया। डॉ. फारुख आफरीदी जयपुर, राजेश भारती (कैथल) एवं डॉ सुशीला जोशी (कोटा) को पुरुषोत्तम पालीवाल स्मृति सम्मान, डॉ. भेरुलाल गर्ग (भीलवाड़ा) को पुष्पा देवी दुग्गड़ स्मृति सम्मान, वंदना यादव (दिल्ली) को मोतीलाल प्रजापति स्मृति सम्मान, अजय कुमार अनुरागी (जयपुर) को श्याम सुंदर नागला स्मृति सम्मान, डॉ. दिनेश प्रसाद शाह (दरभंगा) को बालकृष्ण अग्रवाल स्मृति सम्मान, डॉ गीता गीत को उर्मिला देवी अग्रवाल स्मृति सम्मान, डॉ अलका पांडे (मुंबई) को कमला देवी पुरोहित स्मृति सम्मान, घनश्याम मैथिल अमित को चमन लाल सिंघल स्मृति सम्मान, डॉ मंजू गुप्ता (नवी मुंबई) को सुमन लता सिंघल स्मृति सम्मान , डॉ. अजय शर्मा जालंधर को आशा शर्मा स्मृति सम्मान एवं सत्येंद्र छब्बर (जोधपुर), डॉ. ओमप्रकाश कादयान (हिसार), डॉ. नीरू मित्तल नीर (पंचकूला), इंदिरा त्रिवेदी (भोपाल), नीता सोलंकी (भोपाल), योगिता जोशी (जयपुर) को पुरुषोत्तम पालीवाल स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया।
समारोह में राया मथुरा की संतोष ऋचा ने बाल कहानियों में नैतिक मूल्य और भरतपुर के नरेंद्र निर्मल ने बाल कहानियां संस्कृति के संदर्भ में विषयों पर आलेख पत्रों का वाचन किया। समारोह में बीस साहित्यकारों की कृतियों का अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ कवि एवं व्यंग्यकार सुरेंद्र सार्थक ने सरस्वती वंदना से की है। श्रीनाथ वंदना मथुरा के साहित्यकार अंजीव अंजुम द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन साहित्य मण्डल, प्रधानमंत्री श्याम प्रकाश देवपुरा ने किया। कार्यक्रम में साहित्यकारों का गद्य एवं पद्य परिचय अंजीव अंजुम द्वारा किया गया।

इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कोटा के साहित्यकार रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने की। कोटा के कवि महेश पंचोली ने अपनी आध्यात्मिक काव्य पाठ से कवि सम्मेलन की उत्साहवर्धक शुरुआत की। योगीराज योगी (कोटा) , मंजू गुप्ता ऋषिकेश, महेश पंवार (गुनाडा).मनीषा गिरी (दिल्ली), सुमन (मथुरा), हेमराज (कोटा), वर्षा सिंह (दिल्ली), देवकी दर्पण (रोटेदा), पवन तिवारी (मुम्बई), सुशीला जोशी (कोटा), राजेन्द्र मोहन शर्मा (जयपुर) एवं डॉ.आरती वर्मा कानपुर ने काव्य पाठ कर कवि सम्मेलन को ऊंचाइयाँ प्रदान की। संचालन डॉ. प्रभात कुमार सिंघल ने किया गया।

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Author: dailyrajasthan

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