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गौ रक्षा और सनातन धर्म के उत्थान हेतु दिगम्बर मनसुख गिरी महाराज की जलधारा तपस्या प्रारंभ

गोगुंदा। क्षेत्र के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल ओगड़ जी की धुणी, सादड़ा (ढूंढी) में आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के उपमहंत दिगम्बर श्री मनसुख गिरी महाराज द्वारा विश्व कल्याण, सनातन धर्म की मजबूती और गौ माता की रक्षा के संकल्प के साथ 9 दिवसीय कठोर जलधारा तपस्या एवं महामृत्युंजय यज्ञ का विधि-विधान से शुभारंभ किया गया है। कठोर साधना का स्वरूपरू महाराज श्री कड़ाके की इस ठंड में खुले आसमान के नीचे मिट्टी के घड़ों से अनवरत गिरने वाली जलधारा के बीच बैठकर साधना कर रहे हैं। यह तपस्या दिन-रात निरंतर जारी है। उल्लेखनीय है कि श्री मनसुख गिरी महाराज की इस क्षेत्र में यह पहली तपस्या है। इससे पूर्व उन्होंने लगातार 11 वर्षों तक अन्न का त्याग कर केवल फलाहार पर रहकर कठिन साधना की है।

Pavan Meghwal
Author: Pavan Meghwal

पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।

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