
गोगुंदा – शनिवार को अरावली निर्माण मजदूर सुरक्षा संघ ने भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025 के कड़े विरोध और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम 2005 को फिर से बहाल करने की मांग को लेकर उपखंड अधिकारी शुभम भैसारे को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि पूर्व में नरेगा कानून एक मांग-आधारित, सार्वभौमिक और विकेंद्रीकृत कानून था जो करोड़ों ग्रामीण परिवारों और महिलाओं, आदिवासियों और भूमिहीन मज़दूरों के जीवन को सहारा देता था। लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा नाम बदलकर लागु किए जा रहे अधिनियम से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
ज्ञापन में बताया कि अगर केंद्र-सरकार-नियंत्रित “योजना” बनाती हैं तो काम के क्षेत्र में बजट दिल्ली से तय होगा। यह विधेयक मज़दूरों, ग्राम सभाओं और श्रमिक संगठनों से बिना किसी सलाह से किया जा रहा है । यह राइट टू वर्क नहीं होकर एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जो राज्यों के पास पैसे न होने से जल्दी दम तोड़ देगी। वहीं संगठन ने प्रस्तावित बिल को तुरंत वापस लेने की मांग की हैं।
इस दौरान गणेश लाल , शंकर लाल, वालूराम, पन्नालाल, सुरता राम, भावेश, धर्मराज, सुजाता, मीरा बाई सहित पूजा मौजूद रहे।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।





