
गोगुंदा (उदयपुर) – राजस्थान आजीविका ग्रामीण विकास परिषद (राजीविका) और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में संचालित पहचान कार्यक्रम के माध्यम से किशोरों में आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को सशक्त करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है, इसी कड़ी में बड़गाँव ब्लॉक के रणभूमि सीएलएफ द्वारा लोसिंग ग्राम पंचायत हॉल में एक दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें 14 वीओए और 2 पोषण सखियों सहित कुल 16 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में लोसिंग ग्राम पंचायत के प्रशासक हेमंत श्रीमाली ने कहा कि बच्चे माता-पिता की अनमोल पूंजी हैं। उन्हें रूप-रंग और कद-काठी की तुलना से उपजी हीन भावना से बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उनके गुण, व्यवहार और आत्मविश्वास ही उनकी असली पहचान हैं। उन्होंने बताया कि किशोरों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में माता-पिता और समुदाय की भूमिका अत्यंत अहम है। इस दिशा में जागरूकता फैलाना प्रत्येक महिला और परिवार का दायित्व है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने पहचान टूलकिट (पोस्टर, क्यू-कार्ड और व्यवहारिक गतिविधियाँ) के माध्यम से यह सीखा कि कैसे इनका उपयोग ग्राम संगठनों और स्वयं सहायता समूह बैठकों में संवाद के रूप में किया जा सकता है।
सत्रों में शरीर की तुलना, सोशल मीडिया का प्रभाव, हानिकारक बातचीत, बुलीइंग और जेंडर आधारित धारणाएँ जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।
प्रतिभागियों ने यह महसूस किया कि बच्चों की वास्तविक पहचान उनके गुणों, क्षमताओं और संवेदनशील व्यवहार में निहित होती है, न कि उनके बाहरी रूप या दिखावे में। महिलाओं ने प्रशिक्षण के अंत में यह संकल्प लिया कि वे अपने गाँवों में सकारात्मक परवरिश, सम्मानपूर्ण संवाद और बच्चों की सराहना के संदेश को आगे बढ़ाएँगी।
यह आयोजन राजीविका जिला कार्यक्रम अधिकारी ख्यालीलाल खटीक और यूनिसेफ राज्य सलाहकार ज़मीर अनवर के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के सफल संचालन में डीएमआईबी मेघा चौबिसा, बीपीएम मोनिका मिश्रा, सीएलएफ मैनेजर पूजा नाथ, शांता कुँवर परमार एवं सीएलएफ टीम का सहयोग रहा। साथ ही जिला एसबीसी समन्वयक याशी पालीवाल (अरावली) और टीम सदस्य केसर पालीवाल, अरविंद वर्मा, नरेंद्र मेघवाल एवं कैलाश कुँवर देवड़ा का विशेष योगदान रहा।





