
सायरा – क्षेत्र के भानपूरा निवासी सोमाराम को पत्नी के प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की बीमा राशि का लाभ करीब 11 महिनों के इंतजार के बाद मिला है।
दरअसल भानपुरा की मंगली बाई का निधन अक्टूबर 2024 को हो गया था जिससे बाद उसका पति सोमाराम अकेला पड गया था। सोमाराम तिहाडी मज़दूरी करता और निम्न आय में भरण पोषण कर पाता है। इस समय क्षेत्र में संचालित श्रम सारथी संस्थान सोमाराम के लिए सबसे बडा मददगार बन कर आया। श्रम सारथी संस्थान ने सोमाराम की मदद की जिससे उसको प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत मंगली बाई की नामांकित व्यक्ति के रूप में दावा करने में सहायता मिली।
हालाँकि यह प्रक्रिया सीधी और सरल होनी चाहिए थी, लेकिन यह एक लंबा संघर्ष बन गई। पहला अवरोध एक छोटे से नाम के अंतर के कारण आया जिसमें सोमा राम की बैंक डायरी में उनका नाम होमा लिखा हुआ था, जबकि आधार कार्ड में सोमा लिखा था। इस मामूली वर्तनी के अंतर ने उन्हें दफ्तरों और बैंक के चक्कर लगवाए।
मुसीबतें यहीं खत्म नहीं हुईं। मंगली बाई के निधन के बाद भी उनके खाते से प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना प्रीमियम की कटौती जारी रही, जबकि सभी आवश्यक दस्तावेज़ जिनमें मृत्यु प्रमाण पत्र भी शामिल थे जो पहले ही जमा किए जा चुके थे। इस गलती के कारण और देरी हुई, क्योंकि बैंक को पहले गलत तरीके से काटे गए प्रीमियम को वापस करना पड़ा, तब जाकर दावा प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।

कई महीनों की अनवरत कोशिशों और सत्यापन के बाद आखिरकार दावा निपट गया। नवंबर 2024 में जमा किए गए दस्तावेज़ों के आधार पर 14 अक्टूबर 2025 को दावा राशि सोमा राम के खाते में जमा की गई। सोमाराम के लिए यह राशि केवल आर्थिक राहत ही नहीं, बल्कि महीनों की अनिश्चितता और लगातार प्रयासों के बाद एक भावनात्मक संतोष भी लेकर आई है। उसका ये मामला दर्शाता है कि कैसे छोटे-छोटे दस्तावेज़ी अंतर और प्रक्रियागत देरी उन परिवारों पर भारी पड़ती हैं, जो पहले से ही अपनों की मृत्यु के दुख से जूझ रहे होते हैं।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।





