सायरा (Udaipur)- बारिश के निरंतर चलने के कारण अधिकांश विद्यालयों में छत जर्जर बनी हुई है। बारिश के दिनों स्कूल की जर्जर हालत में बच्चों को शिक्षा देना अध्यापकों के लिए खतरा बना हुआ है। अध्यापकों का कहना है कि न जाने कब कोई खतरा आ जाएं।
क्षेत्र के पिपलसरी राजकीय उच्च विद्यालय प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक शांति लाल गरासिया ने बताया कि विद्यालय भवन की छत विगत 26 वर्षों से बनी हुई है। जो अब पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। अब बारिश का पानी सीधा कमरें एवं बरामदे में टपक रहा है। जिससे बच्चों की बैठक व्यवस्था पुरी तरह से प्रभावित हो रही है। हल्की-सी बारिश होती है तो भी भवन से पानी बहने लगता है। अब बच्चों को कमरों में बैठाना खतरे से खाली नही है। जिससे भारी जन हानि होने की संभावना बनी रहती हैं। 
प्रधानाध्यापक ने बताया कि पूरी स्कूल में चार कमरे बने हुए हैं और बच्चों की संख्या 108 है । जिसमें दो कमरे पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं जो उपयोग में नहीं लिए जाते हैं। एक रसोईघर भी है जिसकी छत भी पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है अब बारिश के चलते खाना पकाना भी भारी पड़ रहा है।
हरियालो राजस्थान या हरियालो भवन
एक तरफ राज्य की सरकार हरियालो राजस्थान अभियान के तहत प्रदेशभर में विद्यालयों को पौधारोपण कर हरा भरा करने की मुहिम चला रही है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर हालत में बच्चों को पढ़ना भारी पड़ रहा है। इस स्कूल की हालत देखकर लग रहा है कि राज्य सरकार हरियालो राजस्थान नहीं बल्कि हरियालो भवन बना रही है। क्योंकि इस विद्यालय की छत जर्जर हालत में होने के कारण पूरी तरह हरे घास जैसे बन चुकी है।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।





