
गोगुंदा (Udaipur) – केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित किए गए केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों में संशोधन को लेकर पेंशन भोगियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में राजस्थान पेंशनर समाज उपशाखा गोगुंदा द्वारा उपखंड अधिकारी आईएएस शुभम भैसारे को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया कि नए विधेयक से पूर्व और वर्तमान पेंशनरों में भेदभाव का अधिकार केंद्र सरकार को मिल गया है, जो न केवल उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का उल्लंघन है बल्कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को भी कमजोर करता है। डीएस नाकरा केस का हवाला देते हुए बताया गया कि पेंशन कोई दया नहीं बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि न्यायालयों द्वारा स्थापित सिद्धांतों को संसद में बहुमत के आधार पर बदलना एक गलत परंपरा की शुरुआत होगी, जिससे भविष्य में कल्याणकारी योजनाएं खतरे में पड़ सकती हैं। पेंशन को संपत्ति का अधिकार मानते हुए अनुच्छेद 300 के तहत संरक्षण की भी मांग की गई। पेंशनर समाज ने मांग की कि इस विधेयक पर पुनर्विचार कर पूर्व पेंशनरों को पहले की भांति सभी सुविधाएं दी जाएं ताकि उनके साथ न्याय हो सके। इस मौके पर पेंशनर समाज गोगुंदा के अध्यक्ष दयाराम प्रजापत, कोषाध्यक्ष सुंदरलाल मेहता, सचिव अनिल रावल, विजय सिंह राणावत, रोशन लाल पालीवाल, भंवर सिंह चौहान, ईश्वर सिंह, राजूलाल मेघवाल व हीरालाल मेनारिया सहित पेंशनर समाज के सदस्य मौजूद रहें।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।





