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कड़ी मेहनत देखकर दर्जनों लोगों ने किया सहयोग, प्रेरणा पाकर दिव्यांग बन गया अध्यापक

गोगुंदा/उदयपुर – कोटड़ा ब्लॉक की ऊखलियात ग्राम पंचायत के रणेशजी गांव के दिव्यांग नेताराम गरासिया ने अध्यापक की नौकारी हासिल की है। 12 दिसम्बर 2023 को गोगुंदा ब्लॉक के रावलिया कला गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में नेताराम गरासिया ने अध्यापक लेवल-2 (गणित-विज्ञान) का पदभार ग्रहण किया। इस दौरान नेताराम की आंखों में सफलता की चमक थी, वहीं जबान पर इस मुकाम तक पहुंचने में सहयोग करने वाले दर्जनों लोगों के लिए आभार के शब्द थे।

नेताराम गरासिया दोनों पैरों से दिव्यांग है। दिसम्बर 2000 में नेताराम का जन्म हुआ था। 2007 में उसने स्कूल जाना शुरू किया। तब उसके पैर सही थे। पहली से तीसरी कक्षा तक की पढ़ाई गांव से 3 किलोमीटर दूर स्थित भांडेर गांव के स्कूल में की। रोजाना 3 किलोमीटर पैदल आना जाना पड़ता था। रणेशजी से स्कूल तक का 2 किलोमीटर लंबा रास्ता तो सही था लेकिन घर से रणेशजी तक खस्ताहाल पगडंडी थी। इसी पगडंडी पर चलकर नेताराम स्कूल आता-जाता था। तीसरी कक्षा में पढ़ने के दौरान ही वो पोलियो से ग्रसित हो गया। पैरों ने काम करना बंद कर दिया और हाथ भी कम काम करने लगे। उसने हाथों से लिखने का अभ्यास जारी रखा। उसने पढ़ना-लिखना नहीं छोड़ा। पिता ने कक्षा 4 में प्रवेश दिलवा दिया लेकिन वो स्कूल आने-जाने में असमर्थ था। उसने घर पर रहकर ही पढ़ाई जारी रखी। परीक्षा का समय आया तो पिता नुराराम उसे कंधे पर बैठाकर स्कूल ले जाते और परीक्षा दिलवाकर वापस घर लाते। यह सिलसिला 8वीं तक की पढ़ाई पूरी करने तक चला। उसने स्कूल लाने-ले जाने में उसके बड़े भाई करमाराम ने भी पूरा सहयोग किया, वे भी उसे कंधे पर बैठाकर कई बार स्कूल ले गए व वापस लाए।

नेताराम को पदभार ग्रहण करवाने के लिए भी उसका बड़ा भाई उसे कंधे पर बैठाकर स्कूल लाया, इस दौरान पिता नुराराम व मां माली बाई भी साथ रहे। उन्होंने माला पहनाकर बेटे का सम्मान किया। नेताराम गरासिया 4 भाई है। सबसे बड़े भाई करमाराम के अलावा 3 भाई दिव्यांग है। पदभार ग्रहण करने के दौरान राजेंद्र सिंह समीजा व दिनेश गरासिया भी साथ रहे।

नेताराम ने 8वीं तक तो घर पर रहकर पढ़ाई कर ली, लेकिन 9वीं-10वीं की पढ़ाई के लिए नियमित स्कूल जाना था। रोजाना आना-जाना अत्यंत मुश्किल था। तब सड़क के पास रहने वाले भूरी लाल पुत्र नाथाराम गरासिया ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया और अपने घर में उसके रहने की व्यवस्था की। घर में बिजली नहीं थी तो रात मे पढ़ने के लिए मिट्टी के तेल व चिमनी की व्यवस्था भी की। नेताराम ने बताया कि बाद में तरपाल के दिव्यांग मित्र कांति लाल पुत्र शांति लाल ने निःशुल्क ट्राई साईकिल उपलब्ध करा दी, जिससे वो अपने बड़े भाई भैराराम के साथ रोजाना स्कूल आने-जाने लगा। 2016 में नेताराम ने 70 प्रतिशत अंकों से 10वीं की परीक्षा पास की।

10वीं के बाद की पढ़ाई के लिए गांव के एडवोकेट सोहन लाल व हूंसाराम गरासिया ने उसे उदयपुर शहर के उदयपुर के फतह स्कूल में प्रवेश दिलाया और स्कूल के पास छात्रावास में रहने की व्यवस्था भी करवा दी। वहां ट्राई साइकिल नहीं होने के कारण कई दिनों तक बड़े भाई भैराराम उसे अपने कंधों पर उठाकर स्कूल ले जाते और लाते। बाद में अध्यापकों ने उसके लिए ट्राई साईकिल सहित आवश्यक वस्तुओं का इंतजाम कर दिया। उदयपुर के काजल शु मेकर के नाना लाल घुटनों में पहनने के लिए जूते बनाकर दे देते। 2018 में नेताराम ने 65 प्रतिशत अंकों से 12वीं (गणित-विज्ञान) उत्तीर्ण की। उसके बाद अध्यापक पप्पू लाल प्रजापत के मार्गदर्शन में बीएससी/बीएड करने का रास्ता अपनाया। 2018 में एमएलएसयू के शिक्षा संकाय में प्रवेश ले लिया। कॉलेज फीस भरने के लिए रूपए नहीं थे, तब उसके पिता ने आधी जमीन गिरवी रखकर फीस की व्यवस्था की। बाद में किराए के कमरे में रहने की जरूरत पड़ी तो मां ने जेवर बेचकर पैसों की व्यवस्था की। किराए पर रहना मुश्किल हुआ तो सहपाठियों की पैरवी पर छात्रावास अधीक्षक डॉ. कैलाश सालवी ने कॉलेज अध्ययन चलने तक नेताराम को छात्रावास में रहने की अनुमति दे दी। वहां से कॉलेज आने-जाने के लिए नारायण सेवा संस्थान ने एक ट्राई साईकिल देकर मदद की। कुछ समय बाद नेताराम को दिव्यांग स्कूटी योजना के तहत स्कूटी मिल गई। कॉलेज की नियमित पढ़ाई के साथ उसने प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी भी जारी रखी। उसने 2022 में 75 प्रतिशत अंकों से बीएससी/बीएड की डिग्री हासिल कर ली।

डिग्री हासिल करने के बाद नेताराम अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 की तैयारी में जूट गया। प्रतियोगिता परीक्षा करनी थी लेकिन परिवार आर्थिक तंगी से परेशानी बनी हुई थी। नेताराम की परेशानी के बारे में जानकारी मिलने पर राजेन्द्र सिंह समीजा ने उसे शिक्षा के लिए गोद ले लेते हुए उसकी नौकरी लगने तक पूरा खर्च वहन करने की जिम्मेदारी ले ली। बाद में उन्होंने तीनों दिव्यांग भाईयों की पढ़ाई का खर्च वहन करने जिम्मेदारी लेते हुए हर माह आर्थिक सहयोग करते रहे। फलस्वरूप नेताराम की पढ़ाई पूरी हो पाई।

नेताराम का कहना है कि मददगारों से मिली मदद से उसे हमेशा कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा मिली। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए नेताराम कहते है कि जिस भी लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं उसे पाने के लिए हमेशा नियमित बने रहे। ईमानदारी से मेहनत करें।

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Author: dailyrajasthan

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