गोगुंदा – क्षेत्र के मन्ना जी का गुडा (रावमादड़ा) गांव में मंगलवार तड़के एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। एक पुराने मकान की छत ढहने से मलबे में दबी माँ और उसके तीन मासूम बच्चों को ग्रामीणों ने अदम्य साहस दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाला। इसे कुदरत का करिश्मा ही कहेंगे कि इतना मलबा गिरने के बावजूद सभी सदस्य बाल-बाल बच गए।
अनिता मेघवाल ने बताया कि गांव के मोहन लाल गमेती मजदूरी के सिलसिले में घर से बाहर थे। घर में उनकी पत्नी शांति बाई अपने तीन छोटे बच्चों के साथ सो रही थीं। सुबह करीब 04 बजे अचानक मकान की छत भरभरा कर गिर गई। भारी-भरकम केलू और बांस की लकड़ियों का मलबा सीधे सो रहे परिवार पर जा गिरा।
उन्होने कहा कि चीख-पुकार सुनकर आस-पास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। बिना समय गंवाए ग्रामीणों ने मलबे को हटाना शुरू किया और नीचे दबे परिवार को बाहर निकाला। शांति बाई मलबे की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हुईं, जिन्हें तुरंत गोगुंदा अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं मासूम दुर्गा (05 वर्ष) को हल्की चोटें आई हैं। गनीमत रही कि इस हादसे में दो अन्य बच्चियां पूरी तरह सुरक्षित हैं।पीड़ित मोहन लाल गमेती एक दिहाड़ी मजदूर हैं और इस हादसे ने उनके सिर से छत छीन ली है। ग्रामीणों ने प्रशासन से भी परिवार की आर्थिक मदद करने की गुहार लगाई है ताकि वे दोबारा अपना आशियाना खड़ा कर सकें। फिलहाल, अस्पताल में माँ और बेटी का उपचार जारी है और उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
हादसे की सूचना मिलते ही पटवारी आनंद पटेल मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि राजस्व नियमों के अनुसार घटनास्थल का मौका पर्चा तैयार कर लिया गया है। उन्होने पीड़ित परिवार को आश्वस्त करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन कोष से सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और नियमों के तहत मुआवजे के लिए आवश्यक एफआईआर और अन्य दस्तावेज तैयार करवाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं वर्तमान में सभी घायल खतरे से बाहर हैं और उनकी स्थिति स्थिर है।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।






