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लोक संस्कृति से रूबरू हो अभिभूत हुए देशी विदेशी पर्यटक

उदयपुर – जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की वार्षिक कार्य योजना के तहत जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के तत्वावधान में माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआई) द्वारा मेवाड़ अंचल की भील जनजाति की प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य नाटिका ‘गवरी’ का मंचन करवाया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को शिल्पग्राम में समापन गवरी का मंचन तहसील झाड़ोल के गांव उपली ओरण के मुखिया गौरी शंकर पारगी के दल द्वारा किया गया।

टीआरआई निदेशक ओपी जैन ने बताया कि सितम्बर माह में जिले में सहेलियों की बाड़ी, फतहसागर पाल और भारतीय लोककला मंडल में गवरी मंचन करवाया जा चुका है। शिल्पग्राम में हुआ आयोजन इस सीजन की अंतिम गवरी रही। इस अवसर पर अति निदेशक प्रशासन ओटीसी बंसीधर कुमावत तथा वरिष्ठ कलाकार एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दिनेश कोठारी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विधिवत पूजा के बाद गवरी दल के मुख्य पात्र शिव के प्रतीक बुडिया, मां पार्वती के प्रतीक राई, गवरी के मुख्य संचालक कुटकुडिया, भोपाजी एवं अन्य दल सदस्यों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।गवरी मंचन में दल के लगभग 40 से 50 सदस्यों ने पूरे दिन गवरी की विभिन्न घाई एवं लघु नाटिकाओं का प्रदर्शन किया। धार्मिक एवं पारंपरिक नृत्य-नाटिका का उपस्थित पर्यटकों और बड़ी संख्या में शहरवासियों ने श्रद्धाभाव से आनंद लिया।

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Author: dailyrajasthan

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