देश के युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जनहित के मुद्दों को लेकर प्रख्यात चिंतक एवं पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक द्वारा किए जा रहे अनशन के समर्थन में शनिवार को जयपुर के शहीद स्मारक (गवर्नमेंट हॉस्टल चौराहा, एम.आई. रोड) पर “चुप्पी तोड़ो सत्याग्रह” का आयोजन किया गया। डॉ. अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी, राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस सत्यवीर सिंह के आह्वान पर आयोजित इस एकदिवसीय सामूहिक अनशन में प्रदेशभर से आए सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों ने भाग लेकर श्री सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति अपना नैतिक समर्थन व्यक्त किया।

जयपुर – प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक चले इस सत्याग्रह में प्रतिभागियों ने शांतिपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में अनशन करते हुए यह संदेश दिया कि देश के युवाओं, विद्यार्थियों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े प्रश्न केवल किसी एक व्यक्ति या संगठन के नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी हैं। वक्ताओं ने कहा कि जब राष्ट्रहित और भविष्य की पीढ़ियों का प्रश्न हो, तब समाज का मौन रहना उचित नहीं है। लोकतंत्र में जागरूक नागरिकों की भागीदारी ही परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति होती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस सत्यवीर सिंह ने कहा कि सोनम वांगचुक का आंदोलन देश के युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की चिंता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह सत्याग्रह किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का मंच नहीं, बल्कि समाज की नैतिक चेतना को जगाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब संवेदनशील नागरिक जनहित के प्रश्नों पर अपनी आवाज़ उठाते हैं, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है।
पूर्व आईपीएस जयनारायण शेर ने कहा कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यदि शिक्षा, रोजगार और अवसरों से जुड़े प्रश्नों पर समाज मौन रहेगा तो इसका दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। सोसाइटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद बैरवा ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन केवल सरकारों से नहीं, बल्कि जागरूक समाज से आता है। महासचिव डॉ. चेतराम रायपुरिया ने संविधान के मूल्यों की रक्षा और लोकतांत्रिक तरीकों से जनहित के मुद्दों पर आवाज़ उठाने का आह्वान किया।
राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष पूजा वर्मा ने कहा कि युवाओं को समान अवसर, पारदर्शी व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना राष्ट्र की प्राथमिकता होनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता रवि मेघवाल ने कहा कि इतिहास में हर बड़ा परिवर्तन तब आया है, जब समाज ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। पूर्व न्यायाधीश टेकचंद, राहुल तथा नरेंद्र अवस्थी ने भी अपने संबोधन में युवाओं के भविष्य, सामाजिक उत्तरदायित्व और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर बल दिया।
सत्याग्रह को विभिन्न समाजों और सामाजिक संगठनों का भी व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। जांगिड़ समाज के संरक्षक सत्यनारायण, ओबीसी महासभा के अध्यक्ष सत्यनारायण सोनी, समग्र सेवा संस्थान के प्रतिनिधि राजेंद्र कुंभज, जाट महासभा के प्रतिनिधि धर्मेंद्र ऐचरा तथा मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि मोहम्मद मुस्तफा ने मंच से अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं का भविष्य किसी जाति, धर्म या वर्ग का विषय नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का साझा प्रश्न है। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि जनहित और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़े मुद्दों पर सभी मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों लोगों ने पूरे दिन अनशन में भाग लिया और सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे संविधान, लोकतंत्र और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए युवाओं के भविष्य, शिक्षा में पारदर्शिता तथा जनहित से जुड़े विषयों पर निरंतर समाज को जागरूक करते रहेंगे।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि “जब भविष्य का प्रश्न हो, तब चुप्पी विकल्प नहीं हो सकती।” राष्ट्रहित, सामाजिक न्याय और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के संकल्प के साथ सत्याग्रह का समापन हुआ।





