
उदयपुर – कहते हैं कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। यदि मेहनत, लगन और सपनों को पूरा करने का जुनून हो तो विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता का रास्ता बनाया जा सकता है। इस बात को जिले के कल्याणपुर क्षेत्र के बिछीवाड़ा निवासी युवा प्रतिभागी विकास ढोली ने साबित कर दिखाया है। आर्थिक अभावों के बीच पले-बढ़े विकास ने अपनी सुरीली आवाज और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर के रियलिटी शो इंडियाज टैलेंट फाइट के फाइनल राउंड में जगह बनाई है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ गांव और क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है।
मजदूरी कर परिवार पालते हैं पिता
विकास बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता मांगीलाल ढोली मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता सीता देवी गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और आज भी परिवार कच्चे मकान में रहता है। विकास सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार में उनके अलावा दो भाई और एक बहन हैं। बड़ा भाई कक्षा 9वीं, छोटा भाई कक्षा 2वीं और बहन भी कक्षा 9वीं में अध्ययनरत है।
आर्थिक परेशानियों के बावजूद विकास ने अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। उन्हें बचपन से ही गायकी का शौक था। संगीत के प्रति यह लगाव उन्हें परिवार और पिता से मिला। पिता से प्रेरणा लेकर विकास घर, परिवार और स्थानीय कार्यक्रमों में गीत गाया करते थे।
सोशल मीडिया बना सीखने का माध्यम
विकास ने संगीत सीखने के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया। वे इंस्टाग्राम पर नामी गायकों के वीडियो देखकर गायकी की बारीकियां सीखते और नियमित रूप से रियाज करते थे। इसी दौरान एक दिन इंस्टाग्राम पर उन्हें इंडियाज टैलेंट फाइट का विज्ञापन दिखाई दिया। उन्होंने बिना देर किए प्रतियोगिता के लिए रजिस्ट्रेशन कर दिया।
प्रतियोगिता में देशभर से करीब 2 लाख प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कड़े मुकाबले के बीच विकास ने अगले दौर में जगह बनाई और आगे बढ़ते हुए टॉप-50 प्रतिभागियों में शामिल हुए। टॉप-50 में चयन के बाद 9 एक्सएम चेनल पर उनका पहला प्रोमो वीडियो प्रसारित हुआ।
उत्तराखंड स्टूडियो राउंड में दिखाया हुनर
टीवी स्टूडियो राउंड के लिए विकास को उत्तराखंड बुलाया गया। इस दौरान उनके नाना नाथूलाल भी उनके साथ रहे। आर्थिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद माता-पिता, नाना और परिवार ने विकास का हौसला बढ़ाया और हर कदम पर उनका साथ दिया।
उत्तराखंड में हुए स्टूडियो राउंड में सारेगामापा की कंटेस्टेंट रह चुकीं निष्ठा शर्मा और मास्टर राजा कृष्णा जज के रूप में मौजूद रहे। विकास ने उनके सामने अपनी गायकी का प्रदर्शन किया। अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने प्रतियोगिता के फाइनल राउंड तक जगह बनाई और आधिकारिक फाइनलिस्ट बने।
गोल्ड मेडल और प्रशस्ति पत्र से सम्मान
फाइनल में पहुंचने पर विकास को गोल्ड मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि का श्रेय विकास अपने माता-पिता, परिवार और नाना के सहयोग एवं संघर्ष को देते हैं।
विकास का कहना है कि उनका सपना इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता को जीतना है। वह अपनी सफलता को अपने पिता के संघर्ष और मेहनत को समर्पित करना चाहते हैं। आर्थिक चुनौतियों के बीच राष्ट्रीय मंच तक पहुंचकर विकास ने क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी यह संदेश दिया है कि संसाधनों की कमी सपनों को रोक नहीं सकती, यदि मेहनत और हौसला मजबूत हो।



