
गोगुंदा – मंगलवार को जलझूलनी एकादशी के पर्व पर पूरा कस्बा ठाकुर जी की भक्ति में रंग गया। गलियों से लेकर मंदिरों तक हर ओर भगवान के जयकारे गूंजते रहे। हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य ठाकुर जी को स्नान कराने के लिए उमड़े और गंगा आरती के दौरान ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बना कि हर कोई भक्ति के रंग में डूबा नजर आया।
गोगुंदा में जलझूलनी एकादशी सामूहिक रूप से भव्य स्तर पर मनाई गई। इस आयोजन की तैयारियां करीब एक माह पहले शुरू हो गई थीं, चारभुजा मित्र मंडल के बैनर तले कस्बे के युवा, धर्मप्रेमी और भगवान चारभुजानाथ के भक्त इससे जुड़ते चले गए।
मंगलवार दोपहर बाद प्रताप चौक के समीप स्थित भगवान चारभुजानाथ मंदिर के मंदिर से ढ़ोल-बाजों के साथ भव्य शोभायात्रा आरंभ की गई। शोभायात्रा गोगुंदा पैलेस के बाहर से होती हुई राणेराव तालाब के गणगौर घाट पर पहुंची। शोभायात्रा में गोगुंदा के चारभुजानाथ मंदिर, खमाण श्यामसुंदर मंदिर, ठाकुर देवरा, लक्ष्मीनारायण मंदिर, मुरलीधर मंदिर, जोधश्याम (लीला) मंदिर, दयालश्याम (वाड़ी) मंदिर, हरमंदर और बैजनाथ मंदिर सहित करीब एक दर्जन मंदिरों के वेवाण (राम रेवाड़ी) शामिल हुए। इस दौरान युवा अलग-अलग समूह आकर्षक वेशभूषा में शामिल हुए। कहीं श्रद्धालु भजनों पर झूमते नजर आए तो कहीं युवा नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे। बड़े-बड़े ताशों की गूंज के बीच अखाड़ों का प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र रहा। हजारों महिला-पुरुष, युवक-युवतियां और बच्चे शामिल थे। चारों ओर ठाकुर जी के जयकारे और भजनों की गूंज सुनाई दे रही थी।
राणेराव तालाब के गणगौर घाट के समीप जलझूलनी एकादशी के लिए भव्य मंच तैयार किया गया था। यहां वरिष्ठजनों, महिलाओं और श्रद्धालुओं के बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी। विभिन्न मंदिरों से आए पुजारियों ने विधि-विधान और श्रद्धाभाव के साथ ठाकुर जी को स्नान कराया। इस दौरान पूरा घाट भगवान के जयकारों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा।
ठाकुर जी को स्नान कराने के बाद पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना करवाई। इसके बाद जैसे ही भव्य गंगा आरती शुरू हुई, गणगौर घाट का पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति से सराबोर हो गया। आरती की लौ के साथ हजारों श्रद्धालुओं के हाथ भी श्रद्धा से जुड़ गए। हर ओर भगवान के जयकारे गूंजने लगे। भक्तिमय वातावरण के बीच हुई भव्य आतिशबाजी ने आयोजन की शोभा और बढ़ा दी। इसके बाद श्रद्धालुओं ने ठाकुर जी के दर्शन किए और अपने परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की व प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम में निवर्तमान उपप्रधान लक्ष्मण सिंह झाला, पूर्व उपप्रधान पप्पू राणा भील, निवर्तमान उपसरपंच लालकृष्ण सोनी, नाहर सिंह देवड़ा, पन्ना लाल तेली, राजकुमार सोनी, पंडित विकास कुमार जोशी, सुरेश तेली, सुरेश लोहार, हरीश चौधरी, धवल सोनी सहित चारभुजा मित्र मंडल के कई कार्यकर्ता और सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। वहीं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एएसआई विनेश कुमार व कांस्टेबल सत्यनारायण सहित पुलिस जाप्ता तैनात रहा।
उधर उंडीथल में जलझूलनी महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। श्री चारभुजा मित्र मंडल द्वारा भव्य राम रेवाड़ी निकाली गई। धार्मिक जयकारों के साथ निकाली राम रेवाड़ी में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्रद्धालुओं ने भगवान चारभुजानाथ के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया। राम रेवाड़ी के आगे-आगे गवरी कलाकर नाचते हुए आगे बढ़ रहे थे, जिससे राम रेवाड़ी का आकर्षण बढ़ गया।
वहीं सायरा, तिरोल, पदराड़ा, सेमड़, कमोल, ढ़ोल, पलासमा, झालों का कलवाना व भानपुरा सहित दर्जनों गांवों में जलझूलनी एकादशी का पर्व बड़े धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर इन गांवों में भव्य शोभायात्राएं निकाली गई। शोभायात्रा में महिला-पुरुष ढोल बाजे की धुन पर नाचते गाते और जय श्रीराम के जयकारे लगाते शामिल हुए। इससे पूर्व विधि-विधान के साथ वेवाणों में बिराजमान भगवान चारभुजानाथ व देवताओं की पूजा-अर्चना की गई। शोभायात्रा में भगवान शिव, श्रीकृष्ण सहित देवताओं की झांकियां शामिल थी। शोभायात्राओं का समापन सरोवरों के तटों पर किया गया, जहां नाचते गाते पहुंचे ग्रामीणों ने सरोवर में ठाकुर जी को स्नान करा कर प्रसाद वितरण किया।
उल्लेखनीय है कि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी एकादशी व्रत किया जाता है। शास्त्रों में इस एकादशी का सर्वाधिक महत्व है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु और उनके आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। कहा जाता है इस दिन माता यशोदा का जलवा पूजन किया गया था। इसे परिवर्तनी एकादशी भी कहा जाता है क्योंकि चातुर्मास के दौरान अपने शयनकाल में इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं।
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करीब 25 दिन बाद जलझूलनी एकादशी पर गवरी ने किया स्नान
जलझूलनी एकादशी पर विभिन्न गांवों में गवरी दलों ने स्नान किया। ठाकुर जी को स्नान कराने के साथ ही गवरी दल के सदस्यों ने भी स्नान किया। गोगुंदा में राणेराव तालाब में वडेरो का भीलवाड़ा की गवरी ने स्नान किया। गवरी दल के सभी सदस्यों ने व्रत रखा वहीं दिन में गवरी कलाकारों की बहनें वडेरो का भीलवाड़ा पहुंची और भाईयों को फूलमालाएं पहनाई, शाम को फलाहार आदि से व्रत खुलवाया। उल्लेखनीय है कि गवरी पर्व 40 दिन चलता है। गवरी आरंभ के बाद लगभग 25 दिन बाद जलझूलनी पर्व आता है, गवरी कलाकार इसी दिन स्नान करते है।



