
उदयपुर – भारतीय युवा कांग्रेस राजस्थान के संगठनात्मक चुनावों को लेकर शनिवार को इलेक्शन कमीशन की ओर से जारी हुई नई रिपोर्ट ने पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक परफॉर्मेंस लिस्ट में कई ऐसे नाम शामिल किए गए थे, जिन्हें केवल कैटेगरी पूर्ण करने के उद्देश्य से जोड़ा गया था, जबकि जमीनी स्तर पर उनकी सक्रियता और संगठनात्मक मजबूती पर सवाल उठ रहे थे। लेकिन अब इलेक्शन कमीशन द्वारा जारी फाइनल सूची ने पूरी तस्वीर साफ कर दी है। प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए केवल 15 उम्मीदवारों के फॉर्म ही स्वीकृत किए गए हैं, जबकि जिन उम्मीदवारों के पास आवश्यक 20 ब्लॉक अध्यक्षों का समर्थन नहीं था, उनके फॉर्म सीधे खारिज कर दिए गए। यह फैसला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि संगठन अब केवल मेहनत, जमीनी पकड़ और वास्तविक नेतृत्व क्षमता को प्राथमिकता दे रहा है।
अगर मेवाड़-वागड़ संभाग की बात करें, तो इस पूरे क्षेत्र से महिलाओं में सिर्फ एक नाम मजबूती से उभरकर सामने आया है वो डॉ. दिव्यानी कटारा का हैं।
कटारा वर्तमान में राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और पूर्व में समाज कल्याण विभाग में प्रदेश ब्रांड एंबेसडर रह चुकी हैं, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से सक्रिय रूप से जुड़ी रही हैं।
उन्होंने अपने दम पर 51 ब्लॉक अध्यक्षों का समर्थन हासिल कर यह साबित कर दिया है कि वे न केवल संगठन में मजबूत पकड़ रखती हैं, बल्कि प्रदेश स्तर पर नेतृत्व करने की पूरी क्षमता भी रखती हैं।
विशेष रूप से अगर एसटी कैटेगरी के दृष्टिकोण से देखा जाए, तो महिलाओं में पूरे क्षेत्र से सिर्फ एकमात्र नाम डॉ. दिव्यानी कटारा भील ही उभरकर सामने आया है।
और यदि एसटी वर्ग के परिप्रेक्ष्य में आकलन किया जाए, तो वे एक मजबूत महिला नेतृत्व के रूप में पहले ही निर्वाचित उपाध्यक्ष के स्तर तक अपनी पहचान स्थापित कर चुकी हैं, जो उनके संगठनात्मक अनुभव और क्षमता को और अधिक मजबूत बनाता है।
दूसरी ओर वागड़-मेवाड़ क्षेत्र से कई ऐसे दावेदार भी सामने आए जिनके पास मात्र 1-1 ब्लॉक ही बनाया, जिन्हें इलेक्शन कमीशन और शीर्ष नेतृत्व ने संगठन की गरिमा को ध्यान में रखते हुए सीधे खारिज कर दिया।





