
जयपुर – राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को बड़ी कामयाबी मिली है। एसीबी ने मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल और लंबे समय से फरार चल रहे पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ पहले से ही गिरफ्तारी वारंट जारी था, जिसके बाद एसीबी की टीम ने उन्हें हिरासत में लिया और जयपुर लेकर आई।
960 करोड़ के टेंडर में खेल
एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता के मुताबिक, साल 2024 से जारी इस जांच में यह अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। जांच में परत दर परत यह खुलासा हुआ है कि कैसे नियम-कायदों को ताक पर रखकर चहेती फर्मों को उपकृत किया गया।
मैसर्स गणपति ट्यूबवेल और मैसर्स श्याम ट्यूबवेल ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के जाली प्रमाण पत्र पेश कर करोड़ों के टेंडर हथियाए।
चौंकाने वाली बात यह है कि जलदाय विभाग के उच्च अधिकारियों को इस धोखाधड़ी की जानकारी थी, फिर भी करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर जारी कर दिए गए।
50 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स में अनिवार्य श्साइट इंस्पेक्शनश् (स्थल निरीक्षण) तक नहीं किया गया, जो सीधे तौर पर पद के दुरुपयोग और भारी भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
15 ठिकानों पर छापेमारी, 10 गिरफ्तार
इस महाघोटाले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 17 फरवरी को एसीबी ने राजस्थान सहित दिल्ली, बिहार और झारखंड के 15 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी थी। उस दौरान जलदाय विभाग के 9 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। सुबोध अग्रवाल तभी से जांच एजेंसी की रडार पर थे और उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी किया गया था।
जांच की कमान और आगे की राह
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव इसकी निगरानी कर रही हैं। डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह और डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के नेतृत्व में गठित एसआईटी तकनीकी पहलुओं और दस्तावेजों की सघन जांच कर रही है।
एसीबी सूत्रों का मानना है कि सुबोध अग्रवाल से पूछताछ के बाद इस सिंडिकेट में शामिल अन्य रसूखदारों के नाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल, मामले में तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश जारी है।





