गोगुंदा – आस्था, परंपरा और लोक-संस्कृति के अनूठे संगम त्रि-दिवसीय गणगौर महोत्सव का सोमवार को हर्षाेल्लास के साथ समापन हो गया। समापन के अवसर पर गोगुंदा की गलियों में मेलार्थियों का ऐसा सैलाब उमड़ा। पूरे कस्बे में राजस्थानी संस्कृति की सतरंगी छटा बिखरी नजर आई।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण गणगौर माता की शाही सवारी रही। ऐतिहासिक चारभुजा मंदिर से जब माता की सवारी गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई, तो पूरा कस्बा गणगौर माता की जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
इस दौरान मधुर धुन बिखेरते बैंड-बाजे, शाही अंदाज में सजे ऊंट और घोड़े आकर्षण का केंद्र रहे। चौगान में जब सवारी पहुँची, तो राजस्थानी परिधानों में सजी महिलाओं और किन्नर समुदाय ने पारंपरिक लोक गीतों पर ऐसा नृत्य किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
मेवाड़ के डॉ. लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने माता की सवारी का पूजन किया, जिसके बाद मेवाड़ महोत्सव मंच पर ग्राम पंचायत की ओर से उनका भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया। उन्हें मेवाड़ी साफा पहनाकर और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस दौरान विधायक प्रताप लाल गमेती, शहर विधायक ताराचंद जैन, भाजपा जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली सहित प्रशासन के आला अधिकारी एसडीएम शुभम भैसारे, तहसीलदार प्रवीण सैनी और कई स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। ग्राम पंचायत और उपखंड प्रशासन के समन्वय से तीन दिनों तक चला यह सांस्कृतिक महाकुंभ बिना किसी व्यवधान के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।
गोगुंदा – आस्था, परंपरा और लोक-संस्कृति के अनूठे संगम त्रि-दिवसीय गणगौर महोत्सव का सोमवार को हर्षाेल्लास के साथ समापन हो गया। समापन के अवसर पर गोगुंदा की गलियों में मेलार्थियों का ऐसा सैलाब उमड़ा। पूरे कस्बे में राजस्थानी संस्कृति की सतरंगी छटा बिखरी नजर आई।
मेवाड़ के डॉ. लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने माता की सवारी का पूजन किया, जिसके बाद मेवाड़ महोत्सव मंच पर ग्राम पंचायत की ओर से उनका भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया। उन्हें मेवाड़ी साफा पहनाकर और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया।




