गोगुंदा – क़स्बे में आयोजित तीन दिवसीय भव्य गणगौर मेले के दूसरे दिन आस्था, उत्साह और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मेले में उमड़ी भारी भीड़ ने जहां बाजारों में जमकर खरीदारी की, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
चारभुजा मंदिर से निकली भव्य सवारी, गूंजे माता के जयकारे
मेले के दूसरे दिन गणगौर माता की सवारी चारभुजा मंदिर से गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई। सवारी कस्बे के मुख्य मार्गों से होते हुए जब चौगान पहुंची, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। यहाँ पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने गणगौर माता की सवारी को सिर पर धारण कर घूमर नृत्य किया, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा।अतिथियों का मेवाड़ी परंपरा से स्वागत
ग्राम पंचायत द्वारा आयोजित इस मेले में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा रहा। कार्यक्रम में पधारे मुख्य अतिथियों का मेवाड़ी साफ़ा और ऊपरणा ओढ़ाकर भव्य सम्मान किया गया। इस दौरान माता की सवारी का विधि-विधान से पूजन कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की गई।इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में तहसीलदार प्रवीण सैनी, थानाधिकारी श्याम सिंह चारण, ग्राम विकास अधिकारी भरत भूषण, प्रशासक कालूराम गमेती, आरआई दयालाल प्रजापत, पूर्व उप-सरपंच दयालाल चौधरी, नान्देशमा मंडल अध्यक्ष नवल सिंह चदाणा, पूर्व उपप्रधान पप्पू राणा भील और करणी सेना जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।सांस्कृतिक संध्यारू तेरा ताल और गैर नृत्य ने बांधा समां
शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में राजस्थान की लोक कलाओं की गूंज रही। गायक कलाकारों की मधुर प्रस्तुतियों के साथ-साथ तेरा ताल और गैर नृत्य ने मेलार्थियों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने आनंद लिया।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।






