गोगुंदा। नेशनल हाईवे 27 पर टोल प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ शनिवार को उपजा आक्रोश अब शांत हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पुलिस प्रशासन और टोल प्रबंधन के बीच हुई सफल वार्ता के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया है।
विवाद का मुख्य कारण और प्रदर्शन
शनिवार सुबह सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों और वाहन चालकों ने टोल प्लाजा पर एकत्रित होकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप था कि टोल कर्मचारी स्थानीय वाहनों से मनमानी वसूली कर रहे हैं और विरोध करने पर अभद्र व्यवहार किया जाता है। प्रदर्शन के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई थीं, जिन्हें पुलिस ने समझाइश के बाद सुचारू करवाया।
सहमति के मुख्य बिंदु
निर्वतमान उपप्रधान लक्ष्मण सिंह झाला के नेतृत्व में हुई वार्ता में टोल प्रशासन ने ग्रामीणों की जायज मांगों को स्वीकार कर लिया है।उन्होने कहा कि स्थानीय रोजगार टोल की नई कंपनी उन स्थानीय युवाओं को वापस काम पर रखेगी, जिन्हें टेंडर बदलने के बाद हटा दिया गया था। लोकल वाहनों को राहत क्षेत्रीय वाहनों से टोल वसूली के नियमों में पारदर्शिता और रियायत बरती जाएगी। टोल प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में किसी भी चालक के साथ अभद्र व्यवहार नहीं होगा। फिलहाल टोल प्रशासन ने ग्रामीणों की मांगों को मान लिया है। हमें उम्मीद है कि अब स्थानीय लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होगा और रोजगार के मुद्दे को भी सुलझा लिया जाएगा।
प्रशासनिक मुस्तैदी
भीड़ और तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए गोगुंदा थाने से एएसआई विनेश कुमार, हरिसिंह, भरतसिंह और हेड कांस्टेबल चरणसिंह सहित करीब 20 जवानों का जाब्ता तैनात रहा। पुलिस की सतर्कता के कारण स्थिति नियंत्रण में रही और दोपहर तक मामला सुलझ गया।
टोल प्रबंधन का पक्ष
वहीं, टोल मैनेजर विपिन कुमार ने आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि टोल बूथ पूरी तरह सीसीटीवी की निगरानी में हैं और नियमों के तहत ही वसूली की जा रही है। उन्होंने कहा कि गलतफहमी को दूर करने के लिए जांच की जा सकती है और प्रबंधन शांतिपूर्ण संचालन के लिए प्रतिबद्ध है।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।
गोगुंदा। नेशनल हाईवे 27 पर टोल प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ शनिवार को उपजा आक्रोश अब शांत हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पुलिस प्रशासन और टोल प्रबंधन के बीच हुई सफल वार्ता के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया है।





