
सायरा। अरावली की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं और बनास नदी के पावन तट पर स्थित राजस्थान की चौथी सबसे ऊंची चोटी, जरगा जी (नया स्थान) में सोमवार को आस्था का भव्य नजारा देखने को मिला। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित इस दो दिवसीय मेले में मेवाड़ और मारवाड़ सहित जयपुर व भीलवाड़ा से आए हजारों श्रद्धालुओं ने मत्था टेका।
किलोमीटर लंबी कतारें, पैदल चलकर पहुंचे भक्त
मेले की लोकप्रियता का आलम यह था कि जरगा जी जाने वाले मार्ग पर वाहनों का रेला लग गया। भारी भीड़ के कारण करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप्प रहा। प्रशासन द्वारा की गई पार्किंग व्यवस्था भी श्रद्धालुओं की भारी संख्या के आगे छोटी पड़ गई। मजबूरन, बुजुर्गों और बच्चों सहित सभी भक्तों को पैदल सफर तय कर मंदिर तक पहुँचना पड़ा।
भक्ति और मनोरंजन का अनूठा संगम
भजन संध्या मंदिर प्रांगण में भजन गायकों ने अपनी स्वर लहरियों से पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। श्रोता भक्ति भाव में विभोर होकर झूमते नजर आए। मेला और बाजार बनास नदी के तट पर लगे हाट-बाजार में रौनक रही। मिठाई, खिलौने और घरेलू सामान की दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई। बच्चों और युवाओं ने झूलों का जमकर आनंद लिया। महाप्रसाद ट्रस्ट की ओर से नदी तट पर आने वाले सभी भक्तों के लिए भोजन प्रसादी की सुचारू व्यवस्था की गई थी।प्रशासनिक चुनौतियां
हालांकि प्रशासन और स्थानीय ट्रस्ट ने पार्किंग और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या उम्मीद से कहीं अधिक रही। इसके बावजूद, भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी और जरगा जी के जयघोष से अरावली की घाटियाँ गूंज उठीं।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।





