उदयपुर। झीलों की नगरी के चांदपोल क्षेत्र में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन के तहत सोमवार को भक्ति और राष्ट्रशक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। आयोजन के दौरान निकाली गई भव्य कलश यात्रा एवं शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र को भगवामय कर दिया। इसमें 500 से अधिक मातृशक्ति ने सिर पर मंगल कलश धारण कर सहभागिता निभाई, जो आकर्षण का केंद्र रही।
जाड़ा गणेशजी मंदिर से शुरू हुई यात्रा
कलश यात्रा का शुभारंभ जाड़ा गणेशजी मंदिर से ढोल-धमाकों और जयघोष के साथ हुआ। यह यात्रा बजरंग मार्ग, पुरोहित चौक, खोड़ी इमली, ब्रह्मपोल, चौबीसा गली और अम्बापोल जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए पुष्प वाटिका पहुंची। शोभायात्रा में नन्हे बच्चों ने भारत माता, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी और विभिन्न देवी-देवताओं के जीवंत रूप धरे, जिन्हें देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
संतों ने दिया एकजुटता और समरसता का संदेश
पुष्प वाटिका में आयोजित धर्मसभा की शुरुआत सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई। सम्मेलन अध्यक्ष चंद्रशेखर द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। सभा को संबोधित करते हुए संतों और वक्ताओं ने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। संत चेतन दास महाराज व पुष्कर दास महाराज ने कहा कि जातियों में बंटकर नहीं, हिंदू के रूप में संगठित होने की आवश्यकता है। हमारी एकता ही धर्म की रक्षा है।
डॉ. अंजली धाबाई व राजेंद्र पामेचा ने सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और गोरक्षा जैसे विषयों पर ओजस्वी उद्बोधन दिया।सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सम्मान
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने देशभक्ति और राजस्थानी गीतों पर मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। झांकी सजाने वाले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाले बच्चों को पुरस्कार व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

उदयपुर। झीलों की नगरी के चांदपोल क्षेत्र में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन के तहत सोमवार को भक्ति और राष्ट्रशक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। आयोजन के दौरान निकाली गई भव्य कलश यात्रा एवं शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र को भगवामय कर दिया। इसमें 500 से अधिक मातृशक्ति ने सिर पर मंगल कलश धारण कर सहभागिता निभाई, जो आकर्षण का केंद्र रही।
संतों ने दिया एकजुटता और समरसता का संदेश



