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मां चामुण्डा गरबा महोत्सव समिति ने श्री माता वैष्णो देवी दी प्रस्तुतियां

गोगुंदा – कस्बे में डांडिया महोत्सव की धूम मची हुई है। शनिवार को कस्बे के मालियो का चौरा में मां चामुण्डा गरबा महोत्सव समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वैष्णो देवी माता जी की विशेष प्रस्तुतियां दी गई। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए पांडाल में बैठे भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर उप प्रधान लक्ष्मण सिंह झाला, पूर्व उपप्रधान पप्पू राणा, भाजपा मंडल महामंत्री सुरेश सोनी, सरपंच कालु लाल, समाजसेवी कमलेश तेली, हरिश चौधरी, कैलाश चौधरी, तुलसी राम भोई, गोर्वधन भोई सहित कई आयोजनकर्ता शामिल थें।

मां वैष्णो देवी कार्यक्रम में पंडित श्रीधर की माता वैष्णो देवी की असीम भक्ति थी । लेकिन उसके भाई और भाभी द्वारा उसकी हंसी उड़ाना और भैरवनाथ की भक्ति करने के लिए बोला करते थे।
भैरवनाथ द्वारा लोगों को डर बता कर खुद को भगवान मानना और माता के भक्त श्रीधर को परेशान करने के लिए अपने भक्तों को श्रीधर के घर भेजना। श्रीधर के घर खाना नहीं होने पर सेठ के यहां भोजन की सामग्री लेने जाना लेकिन सेठ द्वारा मना कर दिया जाता था। तब माता वैष्णो देवी ने बुढ़ापे का रूप धारण कर साधुओं को भोजन करवाया गया।
वहीं संतान प्राप्ति के लिए नवरात्र के व्रत करना लेकिन भैरवनाथ के प्रकोप से कोई भी उसके घर कन्याओं को भोजन के लिए नहीं भेजता था तब माता वैष्णो देवी अपनी 9 बहनों के साथ कन्या रूप में श्रीधर के घर भोजन के लिए गए ।
माता द्वारा भंडारा करवाना और भैरवनाथ को भी उसमें बुलाने के लिए कहना।तब भैरवनाथ श्रीधर का मजाक उड़ता है और भंडारा में भोजन के लिए आता है। लेकिन शुद्ध भोजन की जगह तामसिक भोजन और मांस मदिरा की मांग करना जिसे माता द्वारा मना करना।
भैरवनाथ द्वारा माता को पकड़ने का प्रयास और माता द्वारा 9 माह तक गर्भगृह गुफा में तपस्या करना और उस गुफा की रक्षा हेतु पुजारी और हनुमान जी नियुक्त करना। हनुमान जी के लिए अपने बाण से गंगा का उद्भव करवाना और तपस्या करना।
भैरवनाथ द्वारा श्रीधर पंडित को पाखंडी और मायाजाल वाला बताना और अपने शिष्यों को उसको परेशान करके मारने का प्रयास करवाना लेकिन माता वैष्णो देवी द्वारा अपनी प्रतिमा के गले में पड़ा हार स्वयं माता वैष्णो देवी द्वारा श्रीधर के गले में डालना और पूरे गांव में माता के जयकारे लगने लगे।
भैरवनाथ द्वारा तपस्या करके माता वैष्णो देवी की गुफा का पता लगाना और उनका वध करने का प्रयास करना लेकिन गुफा की रक्षा के लिए पंडित और हनुमान जी के साथ उसका युद्ध होता है और हनुमान जी उसे हारने ही वाले थे समाप्त करने ही वाले थे लेकिन माता वैष्णो देवी वहां प्रकट होकर हनुमान जी से कहते हैं कि इनका वध मेरे हाथों होगा।
फिर माता वैष्णो देवी अपने त्रिशूल से भैरव नाथ का सिर धड़ से अलग कर देते हैं और अंत समय में भैरवनाथ माता रानी से प्रार्थना करते हैं की माता रानी मैने बहुत अन्याय किया है लेकिन सच्ची शक्ति जो है वह आपके पास ही है।आपकी भक्ति में ही शक्ति है।
इसलिए मेरा भी कुछ कल्याण करो तब माता वैष्णो देवी उन्हें वरदान देती है कि मेरे दर्शन के बाद उनकी भी दर्शन होंगे और उनके दर्शन के बिना यह जो दर्शन की यात्रा है वह अधूरी रहेगी और उन्हें अपने पर्वत पर स्थान देती है।

Pavan Meghwal
Author: Pavan Meghwal

पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।

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