उदयपुर – प्रधानमंत्री के 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पूर्ण करने में आज स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। क्योंकि 20 साल बाद यही युवा इसकी नींव होंगे। अत। आज के स्कूली बच्चों को कुशल, दक्ष, जिम्मेदार नागरिक और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना अति आवश्यक है। यह विचार भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव सुधांश पंत ने विद्या भवन सोसायटी द्वारा आयोजित सीड-2 कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को बदलते विश्व के अनुरूप् ज्ञान, मूल्यों और प्रायोगिक कौशल को उपलब्ध कराना जरूरी है। यह स्कूलों के माध्यम से ही संभव है।उन्होंने मिशन लाइफ पर फोकस करते हुए विद्यार्थियों को पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली की ओर प्रवृत्त करने का आह्वान किया और इसके लिए अध्यापकों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कनशा मुक्त भारत के लिए और वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान के लिए अध्यापकों को बच्चों को अभी से सीख देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के मिशन लाइफ, कैच द रैन, नशा मुक्ति अभियान, एक पेड़ माँ के नाम जैसी योजनाओ का हर विद्यालय प्रभावी क्रियान्वयन करे। बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए हमें आज से ही सकारात्मक प्रयास करने होंगे। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन एवं संस्कार आदतें जीवनभर साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्य (सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल) की तरह हो विद्यालय विकास लक्ष्य (स्कूल डेवेलोपमेंट गोल) निर्धारित हो जिसमें प्रतिवर्ष ऊर्जा खपत मे कमी, जल खपत मे कमी, जल बचत, कचरा उत्सर्जन मे कमी का आंकलन हो ।
उल्लेखनीय है कि इस प्रश्न के साथ कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान अर्जित करने या परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहे तरह बदलते हुए जगत में विद्यार्थियों को स्कूल द्वारा किस तरह से तैयार किया जाये, जैसे महत्वपूर्ण विषयो को लेकर विद्या भवन द्वारा तीन दिवसीय शैक्षिक सम्मेलन ‘सीड-2’ फॉर सस्टेनिंग फ्यूचर्स का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन की रूपरेखा हर्थ एडवाइजर्स द्वारा तैयार की गई है। प्रायोजक जे एस डब्लू एनर्जी तथा वीवा फाउंडेशन है।
इस आयोजन में शिक्षाविद्, विद्यालय प्रमुख, नीति निर्माता और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्रित होकर विचार-विमर्श कर रहे है कि तेजी से बदलती दुनिया में बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए कैसे तैयार किया जाए।
मुख्य वक्ता भारत सरकार के पूर्व शिक्षा सचिव तथा नई शिक्षा निति के निर्माण एवं क्रियव्यंन मे प्रमुख भूमिका निभाने वाले संजय कुमार ने कहा कि जब कोई हमको देख नहीं रहा हो, तब भी हम अपना कार्य पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करें, ऐसी शिक्षा विद्यालयो मे मिलनी चाहिये। उन्होंने अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने तथा आत्मविश्वास के साथ बोलने की कला विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में केवल परीक्षा आधारित मूल्यांकन ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आकलन भी आवश्यक है। इसके लिए चार महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए-बच्चे क्या सीख रहे हैं, उन्होंने नया क्या सृजन किया है, उनके द्वारा कौन-सी नई तकनीक विकसित की गई है तथा नवाचार एवं तकनीकी विकास के लिए उन्हें किस प्रकार के संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा स्कूली जीवन मे मिले शिक्षा, संस्कार, अनुशासन, एवं नवाचार जीवन भर साथ चलते है।
प्रमुख शासन सचिव, परिवहन विभाग एवं अध्यक्ष, राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम भवानी सिंह देथा ने सम्मलेन के निष्कर्षाे को सरकार के साथ साझा करने का आग्रह किया। जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए ए आई एक चुनौती है इसलिए उन्हें एआई के बेहतर उपयोग के लिए तैयार करना चाहिए। विद्या भवन के शैक्षणिक सलाहकार, प्रमुख शिक्षाविद शशांक वीरा ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की।
भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत थर्मल पावर एवं कोयला खनन क्षेत्र की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष इंदर पाल सिंह मथारू कहा कि ये धरती हमारी माँ है। जिस तरह हम पंच महाभूतों से बने है वैसे ही धरती माता भी बनी है। हम धरती माता की रक्षा तथा सारसंभाल करेंगे तो धरती माता भी हमें सतत रूप से समृद्धि, स्वास्थ्य व प्रगति प्रदान करेगी।
प्रारम्भ मे विद्या भवन सोसायटी के डॉ. जे.के. तायलिया ने शिक्षा, पर्यावरण एवं सतत विकास के क्षेत्र मे विद्या भवन के कार्याे एवं उपलब्धियों को रेखांकित किया। मुख्य संचालक पूर्व आईएएस राजेंद्र भट्ट ने आभार जताया। संचालन पुष्पराज सिंह राणावत एवं चांदनी गोलछा ने किया।





