गोगुंदा। कहते हैं कि ईमानदारी आज भी जीवित है, और इस बात को सच कर दिखाया है कस्बे के एक छोटे से नाश्ता सेंटर चलाने वाले नारायण लाल प्रजापत ने। नारायण लाल ने कचरे में गिरे रुपयों से भरे पर्स को न केवल सुरक्षित रखा, बल्कि कड़ी मशक्कत के बाद असली मालकिन को ढूंढकर उसे ससम्मान लौटा दिया।
गोगुंदा के सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पास नारायण लाल प्रजापत अपना नाश्ता सेंटर चलाते हैं। सोमवार को क्षेत्र के पाटिया निवासी एक महिला उनकी दुकान पर समोसे खरीदने आई थी। समोसे के पैसे चुकाते समय महिला का पर्स अनजाने में पास ही रखे कचरा पात्र में गिर गया। महिला को इस बात का अहसास नहीं हुआ और वह वहां से चली गई।
नारायण लाल को इस बात का पता तब चला जब वे शाम को दुकान की सफाई कर रहे थे। कचरा पात्र खाली करते समय उन्हें एक पॉकेट मिला। जब उन्होंने उसे खोलकर देखा, तो उसमें 5,400 रुपये नकद थे।
नारायण लाल ने बताया कि जब मुझे कचरे में पर्स मिला, तो मेरा पहला मकसद यही था कि इसे इसके सही मालिक तक पहुंचाया जाए। किसी की मेहनत की कमाई को अपने पास रखना गलत है। उन्होंने कहा महिला का संपर्क नंबर या पता न होने के कारण उसे ढूंढना मुश्किल था काफी प्रयासों और जानकारी जुटाने के बाद महिला से संपर्क हो पाया। मंगलवार को महिला को दुकान पर बुलाया गया और ग्रामीणों की मौजूदगी में पूरे पैसे उन्हें सौंप दिए।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।
गोगुंदा। कहते हैं कि ईमानदारी आज भी जीवित है, और इस बात को सच कर दिखाया है कस्बे के एक छोटे से नाश्ता सेंटर चलाने वाले नारायण लाल प्रजापत ने। नारायण लाल ने कचरे में गिरे रुपयों से भरे पर्स को न केवल सुरक्षित रखा, बल्कि कड़ी मशक्कत के बाद असली मालकिन को ढूंढकर उसे ससम्मान लौटा दिया।




