सायरा। क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुप्रसिद्ध नया स्थान जरगाजी धाम में कलश पूजन की परंपरा को लेकर मेघवाल समाज और सर्व समाज के बीच पिछले लगभग 50 वर्षों से चला आ रहा विवाद आखिरकार गुरूवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप और आपसी सहमति से समाप्त हो पाया है। उपखण्ड अधिकारी एवं उपखण्ड शुभम भैसारे के कुशल मार्गदर्शन और सायरा तहसीलदार सुरेश मेहता की मध्यस्थता से प्राप्त की गई है।
प्रशासनिक पहल और मध्यस्थता
माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा जारी आदेशों की अनुपालना और उपखण्ड अधिकारी शुभम भैसारे के निर्देशों के तहत, तहसीलदार सुरेश मेहता ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की। गोगुन्दा और सायरा प्रशासन के निरंतर प्रयासों से दोनों पक्षों को एक राजम पर लाया गया, जहाँ वर्षों पुराने इस संवेदनशील विवाद का सुखद अंत हुआ।
हस्ताक्षरित लिखित समझौते के अनुसार व्यवस्थाएं
- पूजन का अधिकार गंगावेरी की साफ-सफाई और पूजन का पवित्र कार्य पूर्व की भांति मेघवाल समाज के कोटवाल द्वारा ही संपन्न किया जाएगी।
- कलश की प्रक्रिया गंगा प्रकट होने पर मेघवाल समाज का कोटवाल कलश भरेगा और उसे सर्व सवर्ण समाज के प्रतिनिधि को प्रदान करेगा, जो उसे श्रद्धापूर्वक मंदिर (छतरी) में स्थापित करेंगे।
- सप्तधान परंपरा शेष 16 कलश भी कोटवाल द्वारा भरे जाएंगे और सर्व सवर्ण समाज के व्यक्ति द्वारा उन्हें सात अनाज पकाने हेतु कड़ाहे में डाला जाएगा।
- प्रशासनिक व्यवस्था मेले का संपूर्ण आयोजन प्रशासन और पुलिस की प्रत्यक्ष देखरेख में संपन्न होगा ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
उच्च न्यायालय का निर्णय और प्रशासनिक तत्परता
विदित हैं कि इस मामले को पूर्व में माननीय उच्च न्यायालय ने भी परंपराओं के निर्वहन और कानून व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए थे। उपखण्ड अधिकारी शुभम भैसारे द्वारा पूर्व में जारी प्रशासनिक पत्राचार और न्यायालय के आदेशों के आलोक में इस विवाद का त्वरित समाधान निकालना क्षेत्र की सामाजिक एकता के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।
खुशी का माहौल
समझौता पत्र पर हस्ताक्षर होने के पश्चात मंदिर परिसर में उपस्थित दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे को गुड़ खिलाकर इस निर्णय का स्वागत किया। आगामी 16 फरवरी को आयोजित होने वाले जरगाजी मेले में अब दोनों समाज मिलकर श्रद्धापूर्वक भाग लेंगे। इस दौरान बाबुसिंह, लक्ष्मणसिंह, किसनसिंह, भूरसिंह, करणसिंह, नाथुसिंह, कालूसिंह (जोरमा), कालूसिंह( जैमली), घीसासिंह, केसरसिंह, जवानसिंह सहित मेघवाल समाज के गुलाबचंद्र मेघवाल, पुनाराम, कन्हैयालाल, अंबालाल, पटवारी नेमराज, नानालाल, दौलतराम, मोहनलाल, मोहनलाल (जोगीदास जी का गुड़ा),शंकरलाल, भंवरलाल, और मोहनलाल (आतरी) सहित कई समाज के लोग मौजुद रहें।
Author: Pavan Meghwal
पवन मेघवाल उदयपुर जिले के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है। मेवाड़ क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे है।
सायरा। क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुप्रसिद्ध नया स्थान जरगाजी धाम में कलश पूजन की परंपरा को लेकर मेघवाल समाज और सर्व समाज के बीच पिछले लगभग 50 वर्षों से चला आ रहा विवाद आखिरकार गुरूवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप और आपसी सहमति से समाप्त हो पाया है। उपखण्ड अधिकारी एवं उपखण्ड शुभम भैसारे के कुशल मार्गदर्शन और सायरा तहसीलदार सुरेश मेहता की मध्यस्थता से प्राप्त की गई है।




