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अल्फाज़ और आवाज़’ में गीत-संगीत की प्रस्तुतियों ने मन मोहा

उदयपुर। ज्येष्ठ माह में नौतपा से तप रही लेकसिटी में गीत-संगीत की प्रस्तुतियों से भरी सुकून भरी शाम ने शहरवासियों के कानों में शब्द रस घोलकर तपन से राहत दी। मौका था ‘अल्फाज और आवाज‘ कार्यक्रम के दसवें संस्करण के तहत सनातनी गीतकार और शायर कपिल पालीवाल तथा गायिका मारीशा दीक्षित की प्रस्तुतियों का। होटल पैरेलल तथा म्यूजिक व मेलोडीज  के तत्वावधान में आयोजित इस कविता और सुरों से सजी शाम में देर तलक विविध प्रस्तुतियों का मौजूद अतिथियों और प्रबुद्धजनों ने जमकर लुत्फ उठाया। 

मारिशा दीक्षित के सदाबहार गीतों से प्रारंभ हुए कार्यक्रम में राजस्थानी गीत ‘जल्ला सेण और उमराव थारी बोली से कार्यक्रम को गति प्रदान की। उसके बाद ‘भैया ना धरो बलमा, बाखुदा अब तो कोई तमन्ना ही नहीं गजल के माध्यम से ही अपनी प्रस्तुति देखकर दाद लूटी।

शहर के गीतकार एवं शायर कपिल पालीवाल ने अपने अंदाज में जीवन के कई पहलुओं को छूते हुए ‘प्रेम बिरहा गरीबी इत्यादि के साथ संवेदनात्मक अपनी शेरो शायरी और काव्यात्मक प्रस्तुति दी। गीतकार कपिल ने मां से जुड़ी कई संवेदनात्मक शेरो शायरी एवं गीत गजलों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इसके साथ ही अतिथियों के आग्रह पर राजस्थानी गीतों, राजस्थानी शायरी और गजलों को प्रस्तुत किया। उन्होंने पन्नाधाय एवं राणा प्रताप और मेवाड़ी की बात करते हुए भाषा के महत्व पर भी जानकारी दी और मौजूद लोगों को मेवाड़ी बोलने का आग्रह भी किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्केच आर्टिस्ट सुनील लड्ढा ने कहा कि गीत-संगीत के माध्यम से मानव मन को जो सुकून की प्राप्ति होती है वह दुनिया की किसी भी अन्य चीज से संभव नहीं। उन्होंने कार्यक्रम में शहर की दोनों प्रतिभाओं द्वारा गीत-कविता और गजल-शायरियों की प्रस्तुतियों को स्तरीय बताया और इनसे अन्य प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलने की बात कही।

इस मौके पर समाजसेवी किरण नागदा ने कार्यक्रम परिचय देते हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में म्यूजिक एंड मेलेडीज के चिन्मय दीक्षित ने ‘आवाज और अल्फाज’ कार्यक्रम श्रृंखला के दसवें संस्करण की विशिष्टता पर जानकारी दी और मेवाड़ व मेवाड़ी के महत्व को उद्घाटित किया। कार्यक्रम की मॉडरेटर आरजे रिया रही जिन्होंने कपिल पालीवाल के साथ कार्यक्रम का सफल रूप से संचालन किया।

 

इस मौके पर वरिष्ठ गीतकार एवं कवि पुरुषोत्तम पल्लव, निर्भय शंकर दीक्षित, आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा, प्रस्तर शिल्पकार हेमंत जोशी, सुनील राठौड़ एवं शहर के कई साहित्य प्रेमी व प्रबुद्ध जन मौजूद रहे।

 

मां पर सुनाई कविताओं ने झकझोरा  

 

कार्यक्रम दौरान कपिल पालीवाल ने मां की ममता और वर्तमान पीढ़ी की उपेक्षा के हालातों पर अपनी पंक्तियों के माध्यम से मौजूद लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने अपनी पंक्तियां ‘‘ न जाने अनजाने कितने उसने पुण्य कमाए हैं, थक कर भी घर आ कर जिसने मां के पैर दबाए हैं…उस भोली सूरत पर जाने… कितनी बार वो चीखे है..गुस्सा मत कर कह कर जिसने बाल में हाथ फिराए हैं.. वृद्धाश्रम की खिड़की  में जो बैठी है यूं गुमसुम सी..एक गोद में दो दो बच्चे जिसने साथ सुलाए है..। जब सुनाई तो मौजूद श्रोताओं ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। इसी तरह उन्होंने जिनके सायों पर भी हिफाजत की दुआएं हैं, कितने खुश नसीब हैं वे बच्चें जिनकी माएं हैं…प्रस्तुत कर लोगों को सम्मोहित कर दिया।

 

दूर बहुत जाना पड़ता है देखने, आखिर करीब कौन है 

 

कार्यक्रम में कपिल पालीवाल ने अपनी पंक्तियां ‘ हर एक चेहरा अपना सा, आवाज सबकी मौन है, दूर बहुत जाना पड़ता  है देखने, आखिर करीब कौन है’ प्रस्तुत करते हुए वर्तमान प्रसंगों में अपने-पराये की पहचान बताई। इसी तरह उन्होंने ‘आवाज उसे दू तो, लौट आती हैं मुझी  तक सदाएं , ….तथा ‘दर्द बेशक बहुत हैं मगर आंख अब रोती नहीं’…. प्रस्तुत कर प्रेम व विरह की प्रस्तुतियां दी। इसी प्रकार उन्होंने ‘तेरा हर एक अश्रु गंगा, तेरी आंखों में डूब हम पवित्र हो जाते हैं, हमें जीते जी मिल गया ये मौका, लोग कलश में बंद हो गंगा जी जाते हैं।’ प्रस्तुत कर लोगों को भावुक कर दिया।

 

शिव-कृष्ण आधारित प्रस्तुतियों से चढ़ा सनातनी रंग

 

पालीवाल ने अपने अंदाज में भगवान शिव व कृष्ण की प्रस्तुतियों के माध्यम से शाम में सनातनी रंग घोल दिया। उन्होंने शिव की स्तुति करते हुए कहा ‘‘सत्यम शिवम हे सुंदरा.. हे त्रिनेत्र धारी दिगंबरा.. तुम्हारी शरण हूं अभयंकरा .. करो कृपा हे दिगंबरा..करो कृपा हे सबके देव..त्वं शंभो शंकर काल त्वमेव.. तेरा अंश व्योम गगन धरा.. हे उमापति जगदीश्वरा ..करो कृपा हे दिगंबरा… तुम दयालु कर्ता कृत्य हों.. भयावह तांडव नृत्य हो… पापो से मै लबालब भरा.. तुम तार लो शिव शंकरा..तुम शिव तुम ही शक्ति हो..तुम ईश तुम ही भक्ति हो..ना होऊं विमुख तुमसे जरा..दया करो विश्वंभरा…’‘ पंक्तियों के साथ शिवाराधना की। पालीवाल ने श्रीकृष्ण की वेशभूषा-भाव भंगिमाओं की प्रस्तुति देते हुए जब कहा ‘‘ कस्तूरी तिलक ललाट पटल..हृदय में राधा प्रेम अटल..एक हाथ मुरली एक सुदर्शन..राधा माधव असुर निकंदन..जय श्री कृष्ण तुम्हे नित वंदन…’’ के साथ ‘‘रूप विराट कभी रूप सलोना..मेरे भी घर एक दिन चलो ना..हर बार सुदामा ही आए क्या..? मित्रता में कैसा बंधन… जय श्री कृष्ण तुम्हे नित वंदन… की प्रस्तुति दी। पालीवाल ने भगवान श्रीनाथजी की महिमा का शब्द चित्र प्रस्तुत किया तो श्रोता अभिभूत नजर आए। उन्होंने अपनी पंक्तियां ‘‘अद्भुत दर्शन सुखदाई है… गौ क्रीड़ा की पिछवाई है.. महिमा उनकी अपार है.. वनमाला का श्रृंगार है …प्रस्तुत करते हुए तालियां बटोरी। इसी प्रकार उन्होंने अपनी पंक्तियों में कहा ‘‘कई बार ये मौका हुआ है….. उस सुदर्शन धारी ने मुझे रोका हुआ है.. रिपुदमन तो अपने आप है.. तू क्यों सर लेता पाप है…से श्रोताओं को आकर्षित किया।

 

सनातनी गजल की अनूठी प्रस्तुति

 

कार्यक्रम में पालीवाल ने अपनी सनातनी गजल प्रस्तुति में पहली बार ‘‘जीवन क्या है, क्या सांसों का आना-जाना है, तुझसे निकलकर, फिर से तुझमें ही मिल जाना है।’’’सुनाई तो मौजूद काव्य रसिकों ने देर तक तालियां बजाकर सराहना की। पालीवाल ने ‘ मेवाड़  में एक ही हीरा था, जिसका नाम पन्ना था।’’, ‘जब से सुना है तुम भोले हो, आक हो जाता हूँ मैं‘, ‘‘जब से देखा दिगंबर तुमको, राख हो जाता हूं मैं,’’ ‘‘मुझसे यह बड़ा होने का अहसास खोने लगता है, मां सा हाथ कोई सर पे रखे, मुझ में बच्चा रोने लगता है पंक्तियों को सुनाकर श्रोताओं को आकर्षित किया।

 

Pavan Meghwal
Author: Pavan Meghwal

पवन मेघवाल उदयपुर जिले के गोगुंदा ब्लॉक के मन्नाजी का गुड़ा गांव के है। इन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू किए। ये लिखने-पढ़ने के शौकीन है और युवा पत्रकार है।

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